पाकिस्तान के कोने-कोने में ईशनिंदा कानूनों के गलत इस्तेमाल से परिवार भयभीत हैं। नई रिपोर्ट से पता चला कि वसूली के लिए मना करने पर गिरोह झूठे ब्लास्फेमी केस चला रहे हैं।
मानवाधिकार आयोग के आंकड़ों में 450 से अधिक पीड़ित, खासकर पुरुष, दर्ज हैं। 10 ईसाईयों में पांच हिरासत में ही प्राण त्याग चुके।
इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने जुलाई में 101 परिवारों के आवेदन पर जांच आयोग का आदेश दिया, मगर अपील कोर्ट ने स्थगित कर दिया।
एफआईए के साइबर यूनिट के अधिकारी भी इन साजिशों में लिप्त पाए गए।
उदाहरण है लाहौर का रिक्शावाला आमिर शहजाद। घर से पार्सल लेने गए, लापता। एफआईए ने फेसबुक पोस्ट के नाम पर गिरफ्तार बताया।
मां हर सप्ताह मिलने जाती हैं। शहजाद ने खुलासा किया कि जेल में कई बेकसूर कैदी ऐसे ही फंसाए गए। ये ‘ईशनिंदा सिंडिकेट’ नौजवानों को शिकार बनाते हैं।
परिवार और संगठन न्याय की गुहार लगा रहे हैं। इन कानूनों में बदलाव जरूरी है ताकि बेगुनाह बचें।