पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय की एक मासूम 13 साल की ईसाई लड़की का मामला सुर्खियों में है। अपहरण, जबरन इस्लामिकरण और शादी का शिकार मरिया शाहबाज को अदालत में पेश करने का संघीय न्यायालय ने पुलिस को आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति अली बाकर नजफी और करीम खान आगा की बेंच ने मरिया व शह्रयार अहमद को समन किया। सुप्रीम कोर्ट वकील राना अब्दुल हमीद ने जुलाई 2023 के अपहरण का जिक्र किया। लाहौर की निचली अदालतों ने राहत न दी, इसलिए एफसीसी पहुंचे।
कोर्ट को बताया गया कि नाबालिग के साथ शादी व धर्मांतरण के नाम पर शोषण हो रहा। पुलिस की मिलीभगत से मजिस्ट्रेट ने परिवार की अपील नामंजूर की। लड़की से झूठा बयान करवाया गया।
दस्तावेजों से सिद्ध है कि वह बाल विवाह प्रतिबंध कानून के दायरे में है। पिता ने घरेलू इलाके में अगवा होने की घटना बयान की और थाने में शिकायत की, मगर बाधा बनी।
रिपोर्ट्स में उल्लेख है कि पाकिस्तान में छोटी उम्र की लड़कियों के ऐसे केस बढ़ रहे हैं, जहां अपहरणकर्ता बयान करवाते हैं और जज सबूत अनदेखा कर देते हैं।
अल्पसंख्यकों को ब्लास्फेमी, भीड़ हिंसा, हत्या, संपत्ति हड़पना, जबरन कन्वर्जन जैसी चुनौतियों का सामना। कोर्ट का यह कदम सकारात्मक है, पर व्यवस्था में बदलाव आवश्यकीय।