संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की कश्मीर जिद पर भारत ने तीखा प्रहार किया। आत्मनिर्णय की अवधारणा को तोड़-मरोड़कर पेश करने पर भारत ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया। यह सब गुरुवार को महासभा में गुटेरेस की रिपोर्ट पर बहस के दौरान घटा।
पाकिस्तान प्रतिनिधि असिम इफ्तिखार अहमद ने कश्मीर को फिलिस्तीनी मुद्दे से जोड़ते हुए संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का हवाला दिया। सुरक्षा परिषद के विस्तार के विरोध को दोहराया, जो भारत-विरोधी रुख स्पष्ट करता है।
भारतीय काउंसलर एल्डोस पुनूस ने पलटवार किया, ‘जम्मू-कश्मीर भारत का महत्वपूर्ण और अटूट हिस्सा है। पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के हर मंच का दुरुपयोग करके अपने बांटने वाले इरादों को आगे बढ़ा रहा है।’
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्णय का अधिकार चार्टर का मूल सिद्धांत है, लेकिन इसका इस्तेमाल लोकतांत्रिक देशों में फूट डालने के लिए नहीं होना चाहिए। पाकिस्तान का जम्मू-कश्मीर पर बार-बार बेबुनियाद जिक्र अब लत बन गया है, लेकिन झूठे दावों से बाज आना चाहिए।
1948 का प्रस्ताव 47 पाकिस्तान को कश्मीर से अपनी ताकतें हटाने का आदेश देता है, जो अनदेखा किया गया। कश्मीर के लोकतांत्रिक चुनावों ने भारत से एकीकरण की पुष्टि कर दी है।
पाकिस्तान के विचारों से ज्यादातर देश खफा हैं। भारत का यह दृढ़ प्रतिक्रिया कश्मीर पर उसकी निर्विवाद स्थिति को मजबूत करता है।