संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने गुरुवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकासशील देशों का तेज आर्थिक उभार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और वैश्विक वित्तीय ढांचे में सुधार की अनिवार्य मांग करता है।
महासचिव ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के उलटफेर का वर्णन किया—विकसित देशों का जीडीपी हिस्सा घट रहा है, उभरते बाजार मजबूत हो रहे हैं और दक्षिणी देशों का आपसी व्यापार प्रमुख हो गया है।
1945 की पुरानी व्यवस्थाएं अब अप्रासंगिक साबित हो रही हैं, उन्होंने तर्क दिया। सुरक्षा परिषद के साथ-साथ आईएमएफ जैसी संस्थाओं की सत्ता संतुलन को नया रूप देना होगा।
यूएन की विश्व अर्थव्यवस्था रिपोर्ट बताती है कि 2023 में विकासशील क्षेत्रों ने 4.2% की मजबूत वृद्धि हासिल की, जबकि विकसित दुनिया 2.9% पर सिमट गई। भारत का 7.4% विकास इसे दुनिया की नंबर एक तेज अर्थव्यवस्था बनाता है, जो परिषद सदस्यता के उसके दावे को बल देता है।
अपने अंतिम महासभा भाषण में गुटेरेस ने संकटों के दौर में भी यूएन की प्रगति पर प्रकाश डाला। स्थायी सदस्यों की वीटो राजनीति का परोक्ष उल्लेख करते हुए उन्होंने सहयोग-विरोधी ताकतों की आलोचना की।
बहुपक्षवाद की परीक्षा लेने वालों को चेताते हुए कहा, ‘हम झुकेंगे नहीं।’ संस्था के वित्तीय अभाव पर भी इशारा किया। यह बयान उभरते भारत जैसे देशों के लिए वैश्विक मंच पर अधिक प्रतिनिधित्व का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।