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    Home»World»पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था संकट में, आईएमएफ को दोष देना व्यर्थ: विश्लेषण
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    पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था संकट में, आईएमएफ को दोष देना व्यर्थ: विश्लेषण

    Indian SamacharBy Indian SamacharJanuary 15, 20262 Mins Read
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    पाकिस्तान की आर्थिक कमजोरी को आईएमएफ के बेलआउट पर थोपना देश की अपनी कमियों को ढंकने की कोशिश है, यह कहती है एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट। 25 करोड़ आबादी वाले इस देश में निर्यात उत्पादों और विकास कारकों पर लगी बाधाएं प्रगति को पंखा लगा रही हैं। सुधारों की राह में ये रोड़े आड़े आ रहे हैं।

    पीएम शहबाज शरीफ के पैनल ने उद्योग हितधारकों से बातचीत कर निष्कर्ष निकाला कि आईएमएफ को ब्लेम देना सरकारी उदासीनता का पर्दाफाश है। अगले साल खत्म हो रहे कार्यक्रम से निकलने की योजना बनाने वाले इस पैनल ने सुधारों में ढिलाई को आईएमएफ की शर्तों से जोड़ने को खारिज किया।

    ऊर्जा महंगाई, नीतियों की अस्थिरता, कर व्यवस्था का विकृति, व्यापारिक रुकावटें, संस्थाओं का बिखराव और नियमों का बोझ—ये पुरानी बीमारियां हैं, जो रिपोर्टों में सदा चर्चित रहीं। आईएमएफ ने व्यापार अनुकूल वातावरण बनाने को कहा, किंतु अधिकारी इसे अर्थव्यवस्था की जड़ता का कारण बता अपनी नाकामी छिपा रहे हैं।

    रिपोर्ट बताती है कि राजनीतिक रिश्तों से जुड़ी किराया-खोरी खत्म करने की अनिच्छा साफ झलकती है। एक और विश्लेषण में कहा गया कि बिना मौलिक सोच-परिवर्तन के कम विकास का चक्र चलता रहेगा। 2022 के बाद सरकार ने जनता पर करों का जुल्म ढाया, सब्सिडी छीनी, मगर अपने पक्षपातपूर्ण खर्च बरकरार रखे।

    यह बोझ असंतुलित है, जो साधारण नागरिकों को तड़पा रहा। पाकिस्तान को आईना देखना होगा और गहरे सुधार अपनाने होंगे, न कि बाहरी दोषारोपण।

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