कराची के मंघोपीर में एक मदरसे के शिक्षक द्वारा छह साल के मासूम की बेरहमी से पिटाई का मामला सुर्खियों में है। सिर पर डंडे के प्रहार से बच्चे की खोपड़ी टूट गई और अस्पताल में उसकी मौत हो गई, लेकिन आरोपी को जमानत दे दी गई।
रिपोर्ट्स में सामने आया कि शिक्षक ने हिंसा को जायज ठहराने की कोशिश की और बोला कि बच्चा शरारत कर रहा था। चाचा के बयान ने इस अमानवीयता को उजागर किया।
प्रमुख अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने संपादकीय में तीखा प्रहार किया। ‘खोपड़ी फ्रैक्चर को शरारत का परिणाम बताना व्यवस्था की पोल खोलता है,’ लिखा गया। शहर में विगत मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षकों पर बच्चों से मारपीट और शोषण के आरोप लगते रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो या गंभीर चोटों से ही ये राज खुलते हैं। अनुशासन के नाम पर हिंसा को बर्दाश्त करना अब बंद होना चाहिए।
पुलिस अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि आरोपी को फिर गिरफ्तार कर हत्या का मुकदमा चलाया जाएगा। हालांकि, यह वादा कईयों को अपर्याप्त लग रहा, क्योंकि न्याय तब जागता है जब नुकसान हो चुका हो।
देश को अब कड़े कदम उठाने होंगे—मदरसों में सीसीटीवी, शिक्षक प्रशिक्षण और बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करनी होगी। यह बच्चे की मौत व्यर्थ न जाए।