वैश्विक मंच पर ईरान को कड़ा संदेश मिला है। ओटावा में हुई बैठक में जी-7 देशों के विदेश मंत्री और ईयू प्रतिनिधियों ने तेहरान के प्रदर्शन दमन पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने हिंसा जारी रहने पर सख्त कार्रवाई की धमकी दी है।
दिसंबर अंत से आर्थिक संकट और मुद्रा के अवमूल्यन से उबाले लोगों के विरोध को कुचलने के लिए सुरक्षाबलों ने हजारों जिंदगियां ले लीं। संयुक्त बयान में इस क्रूरता की निंदा करते हुए कहा गया कि ईरानी जनता का संघर्ष सम्मानजनक है।
प्रदर्शनकारियों पर हमले, बिना वजह गिरफ्तारियां और भय का माहौल पैदा करने वाली कार्रवाइयों की कड़ी भर्त्सना हुई। बयान में मांग की गई कि हिंसा रोकी जाए, मानवाधिकारों का पालन हो—जिसमें बोलने की आजादी, सूचनाओं का आदान-प्रदान, शांतिपूर्ण जमावड़े और संगठनों का गठन शामिल है।
यदि उल्लंघन जारी रहे तो अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने की तैयारी का ऐलान किया गया। यह موضع ईरान के भविष्य को प्रभावित करने वाला है।
अर्थव्यवस्था की खराब हालत ने जनाक्रोश को हवा दी है। जी-7 का यह रुख तेहरान को आईना दिखाता है, जहां सुधार ही एकमात्र रास्ता नजर आता है। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने से स्थिति में बदलाव की उम्मीद जगी है।