जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज को भारत प्रवास पर तीन विशेष उपहार मिले, जो देश की समृद्ध शिल्प परंपरा और सांस्कृतिक वैभव को उजागर करते हैं। ये तोहफे दिल्ली में आयोजित समारोह में सौंपे गए, जो द्विपक्षीय मैत्री को मजबूत बनाने का माध्यम बने।
मुख्य आकर्षण रहा मुरादाबाद के कारीगरों का बनाया पीतल का डायमंड डीए62 विमान मॉडल। सोने से जड़ा यह नमूना तकनीकी सटीकता और कलात्मकता का अनूठा प्रदर्शन है, जो जर्मनी की उड़ान कला को भारतीय कुशलता से जोड़ता है।
चमड़े की प्रीमियम पायलट लॉगबुक, सुनहरी नक्काशी युक्त, ने सबको प्रभावित किया। यह भारतीय चमड़ा कला का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो विमानन और शासन के मूल सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करती है।
पाटन पटोला सिल्क की दीवार पतंग ने समापन किया। डबल-इकत तकनीक से रंगे धागों की बुनाई वाले इस वस्त्र में फूल-पत्ती डिजाइन सामंजस्य का संदेश देते हैं, भारतीय आकांक्षाओं को स्थायी रूप प्रदान करते हुए।
भारत की ये भेंटें सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करती हैं और दोनों देशों के रणनीतिक साझेदारी को विश्व पटल पर चमकाती हैं। भविष्य में और गहरा सहयोग सुनिश्चित करने वाले ये उपहार ऐतिहासिक बनेंगे।