भारत और साइप्रस के बीच व्यापारिक संबंध 150 मिलियन डॉलर तक पहुंच गए हैं, जो कूटनीति से लेकर संस्कृति तक फैले मजबूत बंधनों का प्रमाण है। दोनों राष्ट्रमंडल देश अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक-दूसरे के प्रति वफादार हैं।
1960 में आजाद साइप्रस ने 1962 में भारत से औपचारिक संबंध जोड़े। 9,251 वर्ग किमी का यह भूमध्य द्वीप महाद्वीपों को जोड़ता है, जहां 2025 तक 12.7 लाख निवासी बसते हैं। 1974 तुर्की हमले के बाद उत्तर-दक्षिण विभाजन के बावजूद भारत साइप्रस की एकता का पक्षधर बना।
पीएम मोदी का 2025 दौरा, 23 सालों का इंतजार समाप्त करते हुए, ‘माकारियोज III’ सम्मान से नवाजा गया। साइप्रस ने हमेशा भारत के आतंकवाद विरोधी रुख व कश्मीर मुद्दे पर साथ दिया। निकोसिया में भारत का हाईकमीशन सक्रिय है।
आर्थिक मोर्चे पर साइप्रस से फार्मा, मशीनरी, केमिकल्स, सिरेमिक आयात हो रहा है। भारत से दवाएं, कपड़े, स्टील, चावल, चाय, मसाले, मेडिकल उपकरण, सॉफ्टवेयर निर्यात होते हैं। यूपीआई के 2025 समझौते से डिजिटल भुगतान आसान होंगे।
योग-आयुर्वेद की बढ़ती रुचि सांस्कृतिक पुल बना रही है। भविष्य में व्यापार, प्रौद्योगिकी व सुरक्षा सहयोग नई ऊंचाइयों को छुएंगे।