अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयर फोर्स वन से ग्रीनलैंड को लेकर सख्त रुख अपनाया। उनका कहना है कि यह इलाका हर हाल में अमेरिका का होगा, वरना रूस या चीन इसे ले उड़ेंगे।
‘मुझे सौदा करना पसंद है क्योंकि आसान है, लेकिन ग्रीनलैंड हमारा होगा ही,’ ट्रंप ने पत्रकारों से कहा। उन्होंने जोर दिया कि आंशिक कब्जा या लीज से काम नहीं चलेगा, बल्कि पूरा हक चाहिए।
सैन्य विकल्प पर उन्होंने टिप्पणी से परहेज किया, लेकिन अधिग्रहण पर केंद्रित रहने की बात कही। ग्रीनलैंड की कमजोर सुरक्षा पर तंज कसते हुए बताया कि वहां रूसी-चीनी पनडुबियां और जहाजों का खतरा मंडरा रहा है।
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी उपस्थिति बिना मालिकाने के बेकार है। नाटो को मजबूत करने का श्रेय खुद को देते हुए कहा कि सदस्य देश अब रक्षा बजट में जीडीपी का पांच प्रतिशत तक दे रहे हैं।
आर्कटिक का यह डेनिश स्वायत्त क्षेत्र उभरते समुद्री मार्गों के निकट होने से रणनीतिक है। अमेरिका की वहां सैन्य चौकियां हैं, लेकिन प्रतिद्वंद्वियों की गतिविधियां चिंताजनक हैं।
डेनमार्क को अब तक कोई औपचारिक ऑफर नहीं, फिर भी ट्रंप ने ग्रीनलैंड को सौदे के लिए तैयार होने का संकेत दिया। यह बयान वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।