आजकल सड़कों पर विरोध की लहर है, लेकिन जंजीबार की 1964 क्रांति ने दिखाया कि सत्ता कितनी जल्दी बदल सकती है। 12 जनवरी को अफ्रीकी बहुसंख्यक ने विद्रोह कर अरब सुल्तान जमशिद बिन अब्दुल्लाह को सत्ता से हटा दिया। वो हमेशा के लिए देश से भागे।
गुलाम व्यापार के लिए कुख्यात ये द्वीप ब्रिटिश राज से पहले ही इतिहास रच चुके थे—1896 का 38 मिनट का सबसे छोटा युद्ध। फिर 1964 में जॉन ओकेलो ने बगावत की। विद्रोही सरकारी इमारतें कब्जा कर सुल्तान के महल तक पहुंच गए।
शेख करूमे नए नेता बने। अरब वर्चस्व खत्म हुआ, लेकिन हिंसा भयानक थी। अरबों-भारतीयों पर हमले, संपत्ति नष्ट, जातीय संघर्ष ने द्वीप को हिला दिया। फिर भी, अफ्रीकी शक्ति स्थापित हुई।
तंगानायिका से एकीकरण ने तंजानिया बनाया। सुल्तान ओमान में 2024 में मृत्यु को प्राप्त हुए। ये क्रांति आधुनिक आंदोलनों के लिए सबक है कि असंतुलन कैसे उथल-पुथल लाता है।