अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, जहां राष्ट्रपति ट्रंप को ईरानी प्रदर्शनों पर सरकार की कार्रवाई के जवाब में हमलों की योजनाओं से अवगत कराया गया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप नॉन-मिलिट्री टारगेट्स पर हमले समेत विकल्प तौल रहे हैं।
देशव्यापी आंदोलन महंगाई, बेरोजगारी और रियाल की कीमतों के धड़ाम से उपजे हैं। 28 दिसंबर से सड़कें गूंज रही हैं, जिसमें खामेनेई शासन पर हमले हो रहे। हिंसा रोकने को इंटरनेट-पhone सेवाएं 60 घंटे से अधिक कट चुकी हैं।
ट्रंप का ट्रूथ सोशल पोस्ट साफ है- ईरान आजादी चाहता है, अमेरिका सहयोग को तैयार। प्रदर्शन समर्थन के साथ वे पहले चेतावनी दे चुके हैं।
ईरान ने पलटवार किया। एफएम अराघची ने अमेरिका को अशांति भड़काने वाला ठहराया। स्पीकर गालिबफ ने चेताया- हमला हुआ तो अमेरिकी फौज, शिपिंग और कब्जे वाले क्षेत्रों पर प्रहार होगा, जो इजरायल को भी निशाने पर ला सकता है।
संकट की जड़ें ईरान की अर्थव्यवस्था में हैं, जो प्रतिबंधों से जूझ रही। ट्रंप का कदम युद्ध या दबाव का सबब बन सकता है। स्थिति गंभीर, फैसला बाकी।