इस्लामाबाद पुलिस द्वारा अफगान पत्रकार उबैदुल्लाह अहमदी की हिरासत ने पाकिस्तान में शरण लिए अफगान मीडिया कर्मियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। तालिबान के आने के बाद सुरक्षित आश्रय की तलाश में आए लोगों पर अब खतरा मंडरा रहा है।
गिरफ्तारी का कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है और पुलिस ने मौन साध रखा है। यह घटना अवैध अफगान नागरिकों के खिलाफ तेज अभियान के बीच हुई, जिसमें व्यापक जांच चल रही है।
पत्रकार संगठनों का कहना है कि इन अभियानों से कई अफगान रिपोर्टर प्रभावित हुए हैं, जिनके पास पर्याप्त कानूनी ढाल नहीं है। हिरासत में अफगानिस्तान भेजे जाने का भय व्याप्त है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
मानवाधिकार और प्रेस संगठन पाकिस्तान से जिम्मेदारियां निभाने की अपील कर रहे हैं। अमू टीवी और आरएसएफ की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में 20 पत्रकारों का जबरन निर्वासन अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन था।
आरएसएफ ने पाकिस्तानी मीडिया के दस्तावेजों से साबित किया कि यह नॉन-रिफ्यूलमेंट का उल्लंघन है। अन्य पत्रकार गिरफ्तारी और निर्वासन के साये में जी रहे हैं।
तालिबान शासन के बाद 200 पत्रकार पाकिस्तान पहुंचे थे। आरएसएफ की सहायता से पुनर्वास की प्रक्रिया अटकी पड़ी है। मध्य 2025 से परमिट न बढ़ाने से हजारों खतरे में हैं।
पिछले आधे साल में ऐसी कार्रवाइयां तेज हुई हैं। उबैदुल्लाह का मामला इस संकट को उजागर करता है, जहां प्रेस की आजादी दांव पर है।