ईरान की सड़कों पर खामेनेई सरकार के खिलाफ प्रदर्शनकारियों का सैलाब दो सप्ताह से ज्यादा समय से उफान पर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आंदोलन में 116 लोग मारे गए हैं और 2,638 से अधिक गिरफ्तार हो चुके हैं। देशव्यापी इंटरनेट ब्लैकआउट 60 घंटे से जारी है, जो सरकार की कमजोरी को उजागर करता है।
अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने प्रदर्शनकारियों को कालिख पोती है। उनके मुताबिक, विरोध में उतरना खुदा दुश्मनी है, जिसका फौरी अंजाम मौत है। सहायता देने वालों का भी वही हश्र होगा। अमेरिका ने ईरान को हिंसा बंद करने का आदेश दिया है, वरना सैन्य कदम उठाए जाएंगे।
ईरान ने जवाब में अमेरिका-इजरायल को ललकारा है। कहा गया कि किसी हमले पर तेहरान अमेरिकी बेस, नौसैनिक जहाजों और इजरायल को निशाना बनाएगा। इजरायली सूत्रों ने बताया कि ट्रंप को चेताया गया है- हस्तक्षेप का नतीजा तेल अवीव और आसपास के अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल बरसाना होगा।
प्रदर्शनों के समर्थन में अमेरिकी हवेली की आशंका से इजरायल सतर्क है। ईरान की संसद ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी हमले पर सैन्य लक्ष्य ध्वस्त होंगे, इजरायल को खतरा अपरिहार्य। HRANA जैसे संगठन अत्याचारों का हिसाब रख रहे हैं।
आर्थिक मुश्किलों से भड़की यह चिंगारी अब क्रांति की शक्ल ले चुकी है। खामेनेई का तानाशाही तख्ता हिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की जरूरत है, ताकि खूनखराबा रुके और लोकतंत्र की राह खुले।