सिगरेट से जलती सुप्रीम लीडर की फोटो – यह दृश्य ईरान के वर्तमान आंदोलन की पहचान बन गया है। वर्षों बाद नेदा आगा-सोल्तान का नाम फिर गूंज रहा है, जिनकी 2009 में हत्या ने तानाशाही का पर्दाफाश किया था।
चुनावी धांधली के विरोध में तेहरान की गलियां गूंज रही थीं। नेदा सड़क पर से गुजर रही थीं तभी गोली लगी। वीडियो में उनकी सांसें थमती दिखीं, जो पूरी दुनिया ने देखा। वह प्रतीक बन गईं – दमन के खिलाफ एक आवाज।
नाम में ही ‘पुकार’ बसी थी नेदा में। वे स्वतंत्र विचारों वाली थीं, जो लिंग समानता चाहती थीं। आज के प्रदर्शनकारियों में वही भावना दिखती है। आर्थिक संकट, नौकरशाही की मार और महिलाओं पर पाबंदियां – सबके खिलाफ बुलंद है नारा।
सोशल मीडिया ने नया आयाम दिया, लेकिन सत्ता का जवाब वही है – ब्लैकआउट, हिरासतें। महिलाएं सबसे आगे हैं, जोखिम उठा रही हैं। नेदा की कहानी अधूरी है, और आज का संघर्ष उसका विस्तार। ईरान में उम्मीद की किरणें चमक रही हैं।