विदेश मंत्री एस जयशंकर का 4-9 जनवरी 2026 का फ्रांस व लक्जमबर्ग दौरा भारत की यूरोपीय कूटनीति का महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। वर्ष का प्रथम विदेशी दौरा द्विपक्षीय व बहुपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले गया।
फ्रांस में राष्ट्रपति मैक्रों व विदेश मंत्री बैरोट से उच्च स्तरीय बैठकें हुईं। इनमें स्टार्टअप्स, स्वास्थ्य, शिक्षा, मोबिलिटी के साथ रक्षा, अंतरिक्ष, न्यूक्लियर, समुद्री क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की गई।
दोनों ने वैश्विक व क्षेत्रीय परिस्थितियों पर राय रखी। जयशंकर ने फ्रांसीसी राजदूतों की 31वीं सम्मेलन को संबोधित किया, जहां रणनीतिक स्वतंत्रता पर बल दिया। वे पहले गैर-यूरोपीय एफएम हैं इस सम्मान के हकदार।
भारत-वाइमर मंत्रिस्तरीय बैठक में फ्रांस, जर्मनी, पोलैंड के समकक्षों संग भारत-ईयू संबंध मजबूत करने की वकालत की।
फ्रांसीसी विधायकों व समितियों से संवाद के अलावा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी व यूनेस्को अधिकारियों से भेंटवार्ता उपयोगी रही।
लक्जमबर्ग पहुंचकर पीएम फ्रीडेन व डिप्टी पीएम बेटेल संग पूर्ण द्विपक्षीय समीक्षा की। व्यापार, निवेश, डिजिटल, स्पेस व सांस्कृतिक संबंधों पर चर्चा हुई। वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा किए।
स्थानीय भारतीय समुदाय के समक्ष उनके संबंध मजबूत करने वाले प्रयासों की प्रशंसा की।
दोनों देशों का दौरा भारत की यूरोप नीति को प्रतिबिंबित करता है, जहां साझा हित बदलते परिदृश्य में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। ईयू के साथ व्यापक साझा भविष्य की संभावनाएं उजागर हुईं।