इस्लामाबाद से मिल रही खबरें पाकिस्तान के लिए चिंताजनक हैं। संसाधनों से लबालब खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में हिंसा की लहरें विकास की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बन रही हैं। एक तरफ जलविद्युत और खनिज संपदा, दूसरी तरफ तांबा-सोने के भंडार और कोयला क्षेत्र—ये प्रांत देश की समृद्धि की कुंजी हैं, लेकिन आतंकी घटनाएं सब कुछ दांव पर लगा रही हैं।
2025 में हिंसा की घटनाओं में 34 प्रतिशत की तेज रफ्तार देखी गई, मौतें 3417 तक पहुंच गईं। पिछले दस सालों में सबसे घातक यह साल अफगान घटनाक्रम से जुड़ा लगातार पांचवां वर्ष है। प्रांतों में 93 प्रतिशत घटनाएं और 96 प्रतिशत हत्याएं हुईं। खैबर पख्तूनख्वा में 44 प्रतिशत की छलांग से 2331 मौतें, बलूचिस्तान में 22 प्रतिशत बढ़कर 956।
सुरक्षा बलों पर फोकस रहा—सेना के 374 जवान और 22 अधिकारी, पुलिस के 216 शहीद। टीटीपी प्रमुख अपराधी है, उसके बाद बीएलए, बीएलएफ और आईएस समूह। ये चाइना-पाक आर्थिक कॉरिडोर और महत्वपूर्ण साइट्स को निशाना बनाते हैं।
निवेशकों के लिए यह स्थिति चेतावनी है। बिना मजबूत रणनीति के, पाकिस्तान का संसाधन आधारित विकास सपना अधर में लटक जाएगा। समय रहते कार्रवाई जरूरी है।