मधुमेह के इलाज में क्रांति लाने वाली इंसुलिन की कहानी 103 साल पुरानी है। 11 जनवरी 1922 को कनाडा में लियोनार्ड थॉम्पसन नामक किशोर को इस चमत्कारी दवा की पहली खुराक दी गई, जिसने चिकित्सा इतिहास रच दिया।
पहले डायबिटीज रोगी लाइलाज थे। सख्त डाइट से वे धीरे-धीरे मरते चले जाते। थॉम्पसन भी मौत के करीब था। इसी बीच टोरंटो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पैंक्रियास हार्मोन पर शोध किया। बैंटिंग और उनकी टीम ने कड़ी मेहनत से इंसुलिन तैयार किया।
प्रयोग सफल रहा। थॉम्पसन की जान बची, ब्लड शुगर सामान्य हुआ। इसके बाद इंसुलिन का उत्पादन बढ़ा, दुनिया भर में मरीजों को नया जीवन मिला।
आज इंसुलिन मधुमेह प्रबंधन का आधार है। यह सफलता दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प से असंभव को संभव बनाया जा सकता है।