आर्थिक मुश्किलों से तंग जनता के सड़क पर उतरने से ईरान में उथल-पुथल मच गई है। ऐसे में अयातुल्लाह अली खामेनेई ने आईआरजीसी को इजरायल संघर्ष से भी ऊंचे अलर्ट पर रखने का आदेश जारी किया, जो देश की स्थिरता पर गंभीर संकट का संकेत है।
दिसंबर 2025 के आखिर से भड़के ये आंदोलन अब पूरे मुल्क में फैल चुके हैं। महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ नारेबाजी के बीच सुरक्षाबलों से हिंसक भिड़ंत हो रही है। इंटरनेट ठप होने पर भी विरोध थम नहीं रहा और 50-60 की मौत की खबरें आ रही हैं।
आईआरजीसी ने टीवी संदेश में चेताया कि सुरक्षा और संपत्ति की हिफाजत उनकी लाल रेखा है। 1979 की क्रांति की रक्षा प्राथमिक है और अशांति को कड़ाई से दबाया जाएगा।
खुफिया विंग ने विदेशी ताकतों के षड्यंत्र बताते हुए दंगों को आतंकी करार दिया। वरिष्ठ अधिकारी बोले, खामेनेई ने आईआरजीसी को जून युद्ध से ज्यादा मुस्तैद रहने को कहा। भूमिगत मिसाइल बेस तैयार हैं।
खामेनेई ने उपद्रवियों को ट्रंप समर्थक कहा। रेजा पहलवी ने कब्जे की हुंकार भरी, जवाब में मौत की सजाएं। वैश्विक संगठनों ने हिंसा की आलोचना की। तेहरान में जारी संघर्ष गणराज्य की परीक्षा ले रहे हैं।