बलूचिस्तान की धरती पर खूनखराबे का मंजर थम नहीं रहा। मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तानी सेना पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि वह डेथ स्क्वॉड के जरिए निर्दोषों की हत्या करवा रही है। पांक के अनुसार, पंजगुर के तास्प में 8 जनवरी को युवक बलाच बलूच को भागते हुए गोली मार दी गई। ये गुट पाकिस्तान के संरक्षण में कार्यरत हैं।
सुरक्षा बलों का यह पैटर्न कार्यकर्ताओं व परिवारों पर हमलों का है, जो वैश्विक नियमों का दंभभंजन है। केच के होशाब में 5 जनवरी को किशोर राही बलूच की निर्मम हत्या हुई। बीवीजे ने इसे बलूच नरसंहार का हिस्सा करार दिया।
बच्चों के लापता होने के मामले बढ़ रहे हैं, जैसे क्वेटा का गोहराम बलूच। एचआरसीबी की रिपोर्ट में 2025 के 1455 अपहरण दर्ज। एफसी का हाथ 889 में, इंटेल 288, सीटीडी 233, स्क्वॉड 41 में।
कार्रवाई का अंदाज—घरेलू छापामारी (985), जबरन पकड़ (372), नाके (66), कैंप (32)। प्रांत में हिंसक कार्रवाइयां, अवैध गिरफ्तें, लाशें फेंकना, मनगढ़ंत केस—बलूच आंदोलन को कुचलने की कोशिशें हैं। स्वतंत्रता की लड़ाई जारी है।