तालिबान ने भारत स्थित अफगान दूतावास की कमान मुफ्ती नूर अहमद नूर को सौंपी है। नई दिल्ली पहुंचे नूर चार्ज डी अफेयर्स के रूप में जिम्मेदारी निभाएंगे। यह कदम दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक बदलाव दर्शाता है।
विदेश मंत्रालय में फर्स्ट पॉलिटिकल डिपार्टमेंट के पूर्व महानिदेशक नूर अनुभवी राजनयिक हैं। अक्टूबर 2025 के मुत्ताकी दौरे के बाद संबंधों में सुधार हुआ। उस समय नूर मुत्ताकी के साथ थे और जयशंकर से वार्ता में शामिल हुए।
दूतावास के तालिबानी कर्मचारियों को स्वीकार करने का समझौता हुआ। मुत्ताकी ने इसे अपना झंडा व दूतावास बताया। पांच साल बाद तालिबान का यह प्रयास उल्लेखनीय है।
भारत सहायता देता रहेगा, भले मान्यता न दी हो। मुंबई-हैदराबाद दूतावासों में भी तालिबान अधिकारी हैं। गनी सरकार के खिल अब हटाए गए।
अफगान डेलीगेशन ने व्यापार, ऊर्जा व चाबहार पोर्ट पर चर्चा की। यह भारत का रणनीतिक बंदरगाह अफगानिस्तान के लिए लाभकारी बनेगा। नूर का बांग्लादेश दौरा भी उनके सक्रियता का प्रमाण है।
यह नियुक्ति क्षेत्रीय स्थिरता व आर्थिक सहयोग को मजबूत करेगी। आने वाले समय में और प्रगति की उम्मीद है।