ईरान में आर्थिक नाराजगी से उपजी आग अब राजनीतिक सत्ता को लीलने को बेताब है। 28 दिसंबर 2025 से चले आ रहे प्रदर्शनों में 62 से ज्यादा की मौत हो चुकी है, जबकि 2,311 गिरफ्तारियां दर्ज हैं। पूरे देश के 180 शहरों में फैले ये विरोध खामेनेई शासन के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं।
एचआरएएनए की रिपोर्ट में मौतों का आंकड़ा 65 पार कर सकता है। महंगाई, बेरोजगारी और रियाल के अवमूल्यन के खिलाफ शुरू हुए धरने अब खुले तौर पर इस्लामी सत्ता के विरुद्ध हैं। कई इलाकों में इंटरनेट काट दिया गया, फिर भी सड़कें खाली नहीं हुईं।
शुक्रवार को सरकारी चैनलों ने नुकसान माना, अमेरिका-इजरायल को कोसा। खामेनेई ने ट्रंप पर खून के धब्बे लगाए, सख्त कदमों का ऐलान किया। सोशल मीडिया पर जून युद्ध का जिक्र कर अमेरिका को निशाना बनाया।
रजा पहलवी ने ट्रंप से तत्काल मदद मांगी, जिसके बाद भारी भीड़ सड़कों पर उतरी। समर्थकों ने उनकी शाह वंश वापसी की मांग की। 1979 की क्रांति ने उनके पिता को सत्ता से बेदखल किया था।
यह संकट ईरान के भविष्य का फैसला करेगा। सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज हो रही है, लेकिन जनाक्रोश कम होता नजर नहीं आ रहा। अंतरराष्ट्रीय नजरें टिकी हैं।