चीन सरकार नागरिक समाज को कुचलने में जुटी है, एक रिपोर्ट ने बढ़ती असहिष्णुता उजागर की है। विरोध की हर गुंजाइश खत्म होती जा रही है, समाज खामोशी और जबरन एकरूपता में कैद है। म्यांमार की मिज़्ज़िमा न्यूज़ ने बताया कि दमन का यह नया दौर वैश्विक स्तर पर आशंकाएं बढ़ा रहा है।
कार्यकर्ता, प्रदर्शनकारी, विधिवेत्ता, धार्मिक अनुयायी और सोशल मीडिया यूजर्स हर तरफ नजरबंदी और सजाओं के जाल में फंस रहे हैं। न्यायिक प्रक्रिया का मजाक उड़ाया जा रहा, असहमति को अपराध ठहराया जा रहा। मानवाधिकार स्थिति चरम गिरावट पर है।
उदाहरण है हेनान प्रांत के शिंग वांगली का। ‘उपद्रव भड़काने’ के तहत तीन साल की सजा सुनिश्चित, बिना वकील या परिवार के मिले जेल पहुंचाए गए। एक दशक से ज्यादा की कैद झेल चुके वे सत्ता की नीति के शिकार हैं।
रिपोर्ट इसे अलग घटनाओं का नहीं बल्कि सुनियोजित रणनीति का नाम देती है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद चीन का रुख कठोर हो रहा है, जो न सिर्फ आंतरिक लोकतंत्र को कुंठित कर रहा बल्कि विश्व पटल पर तानाशाही का संदेश दे रहा। भविष्य में बदलाव की उम्मीदें धुंधली पड़ रही हैं।