इस्लामाबाद की आर्थिक केंद्रीकरण नीति के तहत गिलगित-बाल्टिस्तान (पीओजीबी) के प्राकृतिक संसाधनों पर सेना का बढ़ता नियंत्रण स्थानीय लोगों को झूठी उम्मीदें दे रहा है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने पीओजीबी और केपी के 6 ट्रिलियन डॉलर के खनिजों से देश को संकट से उबारने का दावा किया, लेकिन रिपोर्ट इसे निराशाजनक बयानबाजी बता रही है।
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा के विकास के सपने अधर में लटक गए। अफगान डायस्पोरा नेटवर्क की रिपोर्ट में कहा गया कि एसआईएफसी जैसे सैन्य प्रभावित संस्थान रणनीतिक क्षेत्रों पर कब्जा जमा रहे हैं। अप्रैल 2025 का माइनिंग संशोधन अधिनियम और अगस्त 2024 के पीओजीबी नियम बदलावों ने संघीय सरकार को पूर्ण नियंत्रण दे दिया, जिससे क्षेत्रीय प्रशासन कमजोर पड़ गया।
शिगर घाटी में वर्षों बाद सबसे बड़ा प्रदर्शन हुआ, जहां के-2 एक्शन कमेटी ने लोगों को संगठित किया। नारे गूंजे कि कब्जे को बर्दाश्त नहीं। यह विरोध आर्थिक अन्याय से आगे बढ़कर राजनीतिक हाशियाकरण के खिलाफ आवाज है।
रिपोर्ट चेतावनी देती है कि संसाधनों का सैन्यीकरण जारी रहा तो पीओजीबी में अस्थिरता बढ़ेगी। स्थानीय मांग रहेगी- संसाधनों का न्यायपूर्ण बंटवारा और स्वशासन का अधिकार। मुनीर के सपने हकीकत बनें या नहीं, जनाक्रोश रुकने वाला नहीं।