ईरान में हालात नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने सरकारी टीवी पर तीखी भाषण दिया। प्रदर्शनकारियों को लताड़ा कि वे अपनी सड़कों को उजाड़ रहे हैं बस किसी विदेशी राष्ट्रपति को प्रसन्न करने के लिए। उनका इशारा ट्रंप की ओर था, जिनकी अमेरिका ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा पर जवाबी कदम की बात कही।
12 दिनों से चली आ रही ये हलचल महंगाई, आर्थिक पतन और दमनकारी नीतियों से उपजी है। अधिकारियों ने अशांति रोकने को इंटरनेट काट दिया। रॉयटर्स के अनुसार, शहरों में आग की लपटें दिखीं—इमारतें, वाहन सब जल रहे। दक्षिण में पुलिस फायरिंग से 40 से ज्यादा जानें गईं।
खामेनेई ने विदेशी साजिश का रोना रोया, निर्वासित विरोधियों और यूएस को जिम्मेदार ठहराया। रजा पहलवी के रात 8 बजे के आह्वान पर प्रदर्शन तेज हुए। 8 जनवरी को इंटरनेट-फोन सेवाएं बंद कर देश अलग-थलग कर दिया गया।
राष्ट्रपति पेजेशकियान की सरकार, न्यायपालिका और सुरक्षा तंत्र ने कड़ी चेतावनी जारी की। नारे लगाने वालों को कुचलने की धमकी। तेल-निर्भर अर्थव्यवस्था संकट में है। खामेनेई का डटकर मुकाबला करने का ऐलान है, लेकिन सड़कें अभी भी गरम हैं। वैश्विक नजरें टिकी हैं कि यह विद्रोह शासन को हिला पाएगा या नहीं।