फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने अमेरिका को करारा जवाब देते हुए कहा कि यूरोप को उसके अनुचित प्रस्तावों को सिरे से खारिज करने की आजादी है। अपने वार्षिक राजदूत सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने ट्रंप प्रशासन की नीतियों से उत्पन्न तनाव पर प्रकाश डाला, खासकर ग्रीनलैंड खरीदने की मांग पर।
यह विशाल डेनिश द्वीप खनिज संपदा का भंडार है और ट्रंप इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार मानते हैं। बैरोट ने जोर देकर कहा, ‘वे रिश्तों पर पुनर्विचार कर सकते हैं, तो हम क्यों न कहें अगर प्रस्ताव हमारे हित में न हो।’
उन्होंने अमेरिका और रूस दोनों को यूरोप के लिए समान चुनौती बताया। पूर्वी क्षेत्रों में अतिक्रमण, व्यापारिक ब्लैकमेल और ग्रीनलैंड दावों को एकता पर प्रहार करार दिया। ‘ये बाहरी दुश्मन हमारे मतभेदों का लाभ उठाने की again कोशिश कर रहे हैं,’ बैरोट ने कहा।
जर्मन राष्ट्रपति स्टीनमीयर के अमेरिका-विरोधी भाषण के बाद यह बयान और महत्वपूर्ण हो गया, जो दुनिया को लुटेरों का अड्डा बनने की चेतावनी दे चुके हैं। फ्रांस के निकट भविष्य के चुनावों से पहले बैरोट ने महाद्वीपीय मूल्यों को कमजोर करने वाली शक्तियों पर प्रहार किया।
ये घटनाक्रम दर्शाते हैं कि यूरोप अब पुराने गठजोड़ों पर आंख मूंदे भरोसा नहीं करेगा, बल्कि अपनी स्वतंत्र विदेश नीति गढ़ेगा।