डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 66 वैश्विक एजेंसियों को अलविदा कह दिया, जिसमें भारत-नेतृत्व वाला इंटरनेशनल सोलर अलायंस शामिल है। अमेरिकी हितों के खिलाफ बताकर लिए गए इस निर्णय ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सहयोग पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आईएसए ने तुरंत बयान जारी कर अपनी उपलब्धियां गिनाईं। 125 सदस्यों के साथ सोलर ऊर्जा विस्तार में सफलता मिली है, एनर्जी स्टोरेज ने इसे बल दिया। 95+ देशों में कार्यक्रम सक्रिय हैं, जो नियामक ढांचे और बाजार विकसित कर रहे हैं।
डेमो प्रोजेक्ट्स ने सोलर की क्षमता प्रमाणित की। संगठन ने कहा, ‘हम साझेदारी बनाए रखेंगे और सौर ऊर्जा संक्रमण को बढ़ावा देंगे।’ अमेरिका का तर्क है कि इन संस्थाओं में संसाधनों की बर्बादी होती है।
रुबियो ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘ट्रंप ने अमेरिका के वादे निभाए, बेकार संगठनों से पीछा छुड़ाया।’ सरकारी बयान में स्पष्ट किया गया कि सहयोग केवल अमेरिकी लाभ के लिए होगा।
भारत के नेतृत्व में आईएसए मजबूत दिख रहा है। यह घटना वैश्विक जलवायु राजनीति में नया मोड़ ला सकती है। सोलर भविष्य की दिशा तय करने वाले कदम पर दुनिया नजर रखेगी।