फ्रांस की राजधानी पेरिस में किसानों ने गुरुवार को तहलका मचा दिया। एफिल टावर तक पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने चैंप्स-एलिसीस पर ट्रैक्टर खड़े कर ट्रैफिक ठप कर दिया। ईयू और दक्षिण अमेरिकी मार्कोसुर ब्लॉक के ट्रेड डील के खिलाफ यह गुस्सा भड़का, जो किसानों की कमर तोड़ सकता है।
प्रदर्शनकारी पुलिस चेकपॉइंट्स पार कर सुबह-सुबह आर्क डी ट्रायम्फ जाम कर चुके थे। राइट विंग रूराल यूनियन ने लामबंदी की, सस्ते आयात से बाजार तबाह होने का खतरा बताया। मैक्रों सरकार के मवेशी बीमारियों से निपटने के तरीके पर भी भारी असंतोष व्याप्त है।
विएने के स्टीफन पेलेटियर, यूनियन उपाध्यक्ष ने कहा, ‘गुस्सा और निराशा हमें घेरे हुए है। मार्कोसुर की तरह हमें अकेला छोड़ दिया गया, एयरबस या कार उद्योग के लिए।’ सरकार ने कड़ी चेतावनी दी कि सड़क जाम गैरकानूनी हैं।
ईयू कमीशन के हालिया प्लान के बाद आया यह विरोध, जिसमें 45 अरब यूरो फंडिंग और उर्वरक शुल्क में छूट की पेशकश की गई। डील से यूरोप को लैटिन बाजारों में वाहन, वाइन एक्सपोर्ट बढ़ेगा, लेकिन फ्रेंच किसानों को ब्राजील आदि से सस्ता माल आने का भय।
मार्कोसुर अर्जेंटीना, ब्राजील, पैराग्वे, उरुग्वे का समूह है। पेरिस की सड़कों पर यह जंग वैश्विक व्यापार के असर को दिखाती है। किसान अब लंबा संघर्ष लड़ने को तैयार हैं, सरकार पर दबाव बढ़ा रहे हैं।