रूस का इतिहास 9 जनवरी 1905 को हमेशा के लिए बदल गया। औद्योगिक क्रांति के दौर में मजदूरों की दुर्दशा चरम पर थी। कम वेतन, लंबे कार्यघंटे और युद्ध की विफलता ने असंतोष को भड़का दिया। पादरी गैपोन ने मजदूरों को एकजुट कर जार को याचिका देने का फैसला लिया।
सेंट पीटर्सबर्ग में विशाल जुलूस विंटर पैलेस की ओर बढ़ा। लोग जार के चित्र और प्रतीक लेकर चले, भरोसा था कि उनका ‘छोटे पिता’ सुनेंगे। मगर सैनिकों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। खून से लाल हो गई धरती, सैकड़ों मारे गए।
इस घटना ने रूस को हिला दिया। कारखाने ठप, जमींदारों पर हमले, नौसेना में विद्रोह। 1905 की क्रांति इसी से उपजी, जिसने जारशाही को कमजोर किया। जनदबाव से अक्टूबर घोषणापत्र आया, ड्यूमा की स्थापना हुई।
इतिहासकार इसे नैतिक संबंध टूटने का दिन मानते हैं। अगर जार ने इसे संभाला होता, तो शायद 1917 का तांडव न होता। ब्लडी संडे शक्ति के दुरुपयोग की मिसाल है।