बांग्लादेश में 17 साल बाद तारिक रहमान की धमाकेदार वापसी ने सियासी हलचल मचा दी है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने नई दिल्ली से आईएएनएस को बातचीत में इसे सकारात्मक कदम करार देने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना है कि यह नया दौर नहीं, बल्कि पुराने विभाजनकारी तत्वों की बहाली है।
‘तारिक रहमान का लौटना कोई प्रगति का प्रतीक नहीं। बांग्लादेश ने ऐसी राजनीति का खामियाजा पहले भुगता है,’ हसीना ने कहा। उन्होंने तारिक के ब्रिटेन प्रवास को भ्रष्टाचार के आरोपों से भागने का जरिया बताया, जहां वे आम जनता की तकलीफों से दूर रहे।
खालिदा जिया और जियाउर रहमान के पुत्र तारिक पर हसीना सरकार ने भ्रष्टाचार और अनधिकृत सत्ता चलाने के इल्जाम लगाए थे। आज देश हिंसा और कट्टरता की चपेट में है, कानून का डर खत्म हो चुका। चुनावों से बीएनपी के दूरी के चलते तारिक की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
खालिदा काल में भारत से तनावपूर्ण रिश्तों के बीच तारिक संप्रभुता के हितैषी बनने का प्रयास कर रहे हैं। हसीना ने चेतावनी दी कि इससे राजनीतिक खाई चौड़ी होगी। बीएनपी की धमकी वाली रणनीति पर उन्होंने नाराजगी जताई, जो लोगों को जबरन पार्टी के पक्ष में करने को मजबूर कर रही है।
हालिया सर्वे तारिक को प्रधानमंत्री पद का प्रबल दावेदार बता रहे हैं, जिन्हें ‘डार्क प्रिंस’ कहा जाता है। फिर भी हसीना ने जोर देकर कहा कि भ्रष्टाचार, हिंसा और उग्रवाद से जुड़े नेतृत्व से राष्ट्र निर्माण असंभव है। सच्चा नेतृत्व जवाबदेही और जनसंपर्क पर टिका होता है। भारत समेत दुनिया बांग्लादेश के सियासी भविष्य को देख रही है।