बांग्लादेश चुनावों की तैयारी जोरों पर है, लेकिन खालिदा जिया के निधन ने राजनीतिक घमासान छेड़ दिया। पूर्व पीएम शेख हसीना ने आलोचकों को ललकारा कि उनकी मौत को राजनीतिक रंग देकर देश को बांटने की कोशिश न करें। उन्होंने इसे एक खतरनाक रुझान बताया, जो सच्चाई को आरोप में बदल देता है।
80 वर्षीय खालिदा जिया, बीएनपी की लंबे समय तक नेता और तीन बार की पीएम, 30 दिसंबर 2025 को बीमारी से चल बसीं। राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार हुआ। बीएनपी ने नजरुल इस्लाम खान के माध्यम से हसीना पर इलाज में कोताही का आरोप लगाया, दावा किया कि 2018 से जेल में रखे जाने से उनकी हालत खराब हुई।
हसीना ने इंटरव्यू में शोक जताया, ‘उनकी कमी राजनीतिक जीवन में बहुत बड़ी है। अलग विचारधारा होने पर भी देशहित में योगदान सराहनीय। परिवार को सांत्वना।’ उन्होंने जिम्मेदारी से इनकार करते हुए एकता की अपील की।
पूर्व मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी ने प्रतिवाद किया कि हसीना ने जिया के लिए सर्वोत्तम व्यवस्था की- प्रमुख अस्पताल, विदेशी चिकित्सकों से जीवनरक्षक ऑपरेशन। ‘सरकार जाने के बाद स्वास्थ्य गिरा। घरवास और वैश्विक इलाज मिला, कोठरी नहीं। यह सियासी वैमनस्य से परे इंसानियत थी।’
चुनाव नजदीक आते ही यह टकराव अवामी लीग-बीएनपी की पुरानी दुश्मनी को फिर उभार रहा है। हसीना की चेतावनी गूंज रही है- विभाजन नहीं, सम्मान का समय है। बांग्लादेशी जनता दोनों नेताओं की विरासत को कैसे देखेगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।