बांग्लादेश की पूर्व नेता शेख हसीना ने भारत से रिश्तों पर मजबूत यकीन जताया है। ईमेल बातचीत में उन्होंने कहा कि मौजूदा चुनौतियां इन संबंधों को कमजोर नहीं कर पाएंगी। पीएम मोदी और भारतीयों के प्रति आभार जताते हुए उन्होंने ‘मानवीय समर्थन’ की सराहना की।
‘इतिहास, जमीन, सहकारिता और शांति की प्रतिबद्धता हमें जोड़ती है,’ हसीना ने जोर दिया। भारत का लोकतंत्र, अल्पसंख्यक हिफाजत और क्षेत्रीय सुरक्षा पर रुख बिल्कुल ठीक है। ‘लोकतांत्रिक रूप से चुनी सरकार वाला बांग्लादेश ही सच्चा साझीदार बनेगा।’
यूनुस सरकार के दौर में हिंदुओं पर अत्याचार, भारतीय दूतावासों पर हमले और अस्थिरता बढ़ी है। फरवरी चुनावों से पहले हालात चिंताजनक हैं, राजनीतिक झड़पें तेज हैं।
फिर भी हसीना का मानना है कि ‘यह मुश्किल वक्त गुजरेगा। जनता का फैसला रिश्तों को नई ताकत देगा।’
भारत ने अल्पसंख्यक हिंसा पर गहरी चिंता दिखाई। जायसवाल ने मयमनसिंह हत्या की कड़ी निंदा की। झूठे ‘भारत-विरोधी बयानों’ को नकारा, सुरक्षा की जिम्मेदारी अंतरिम सरकार पर डाली।
उच्चायुक्त को बुलाकर मिशनों पर खतरे बताए गए। मंत्रालय डेटा: 2900+ घटनाएं—कत्ल, लूट, कब्जे—जो राजनीतिक बहाने से टाला नहीं जा सकता।
यह बयान तब आया जब दोनों देश पड़ोसी के रूप में व्यापार, सुरक्षा और संस्कृति में गहराई चाहते हैं। हसीना की बात चुनावी परिणामों से मजबूत साझेदारी का संकेत देती है।