चक्रवात दित्वाह से श्रीलंका की अर्थव्यवस्था और जीवन पटरी से उतर गया, लेकिन भारत की ओर से चलाया जा रहा ऑपरेशन सागर बंधु उम्मीद की किरण बन गया है। भारतीय सेना की मेहनत से क्षतिग्रस्त इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार मजबूत किया जा रहा है, जिसका स्थानीय लोग खुलकर स्वागत कर रहे हैं।
बी-492 ब्रिज, जो कैंडी और बादुल्ला को जोड़ता है, तूफान में ध्वस्त हो गया था। इंजीनियर टास्क फोर्स ने 15 किमी और 21 किमी पर बैली ब्रिज बनाकर यात्रियों की परेशानी दूर की। इससे अलग-थलग पड़े गांव फिर जुड़ गए और आर्थिक गतिविधियां पटरी पर लौटीं।
एक्स प्लेटफॉर्म पर पोस्ट वीडियो में छात्रा बोलती नजर आती है, ‘भारत से इतनी दूर आकर आपने जो मदद की, उसके लिए हृदय से आभार। पुल टूटने से हम फंस गए थे, आपने रास्ता बना दिया। बहुत धन्यवाद।’ भारतीय सेना ने इसे साझा कर भाईचारे को रेखांकित किया।
नवंबर 2024 में दित्वाह के हमले पर भारत ने फर्स्ट रिस्पॉन्डर बनकर ऑपरेशन शुरू किया। आईएनएस विक्रांत व उदयगिरी को श्रीलंकाई नेवी उत्सव से राहत कार्यों में झोंक दिया गया। बाढ़ व भूस्खलन ने स्थानीय संसाधनों को चपेट में लिया, तब भारत की एचएडीआर मदद ने संकट कम किया।
महियांगनया में बने फील्ड हॉस्पिटल ने हजारों को चिकित्सा दी, जिसमें सर्जरी और इमरजेंसी केयर शामिल थी। ऑपरेशन सागर बंधु न सिर्फ भौतिक सुधार ला रहा है, बल्कि दोनों देशों के स्नेह को और गहरा कर रहा है। यह अभियान दक्षिण एशिया में आपसी सहयोग का बेहतरीन नमूना है।