वेनेजुएला पर अमेरिकी पाबंदियों ने तेल व्यापार की दुनिया को हिला दिया है। खासकर भारत, जो वहां भारी निवेशक है, के लिए यह चुनौतीपूर्ण दौर है। पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने हालिया बयान में स्थिति का जायजा लिया और भविष्य की राह दिखाई।
6 बिलियन डॉलर के निवेश से भारत को सस्ता क्रूड मिलता था। ओएनजीसी ने सैन क्रिस्टोबल में 40% और अन्य प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी रखी। प्रतिबंधों ने सब रुकवा दिया। श्रृंगला बोले, ‘यह बड़ा तेल उत्पादक देश है। बैन हटने का इंतजार करें और विकल्प तलाशें।’
ब्रोकरेज फर्म जेफरीज मानती है कि सत्ता बदलाव से ओएनजीसी को 500 मिलियन डॉलर का फंसा पैसा मिलेगा। 2014 तक का डिविडेंड बाकी है। अमेरिका के दबदबे से निर्यात सीमाएं ढीली पड़ सकती हैं, बाजार में तेल बढ़ेगा और दाम घटेंगे।
ट्रंप की चेतावनी के बावजूद आशा बाकी है। भारत को अब वैकल्पिक स्रोत मजबूत करने होंगे। श्रृंगला का विश्लेषण बताता है कि कूटनीति और आर्थिक हितों का संतुलन जरूरी है। आने वाले दिन तय करेंगे भारत का तेल भविष्य।