बांग्लादेश के हिंदू समुदाय पर लगातार हमले सरकार की लाचारी को बेनकाब कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सत्ता परिवर्तन के बाद सुरक्षा का खालीपन अपराधियों को खुली छूट दे रहा है। हिंदू दुकानदार, जिनकी दुकानें बाजारों में खड़ी हैं, सबसे ज्यादा निशाने पर हैं।
नरसिंदी बाजार में मणि चक्रवर्ती का कत्ल पिछले तीन हफ्तों में छह हिंदुओं की हत्या का हिस्सा है। गवाहों की भरमार के बावजूद कोई सुराग नहीं, जो पुराना पैटर्न बन चुका है। राजनीतिक प्रभावहीनता के कारण न्याय मिलना मुश्किल है।
शेख हसीना का जाना एक युग का अंत था। उनकी एकछत्र सत्ता ने भले दमन किया हो, लेकिन सांप्रदायिक तनाव पर काबू रखा। यूनुस सरकार को अब अधरंगीन व्यवस्था मिली, जहां पुलिस ऊपरी आदेशों के बिना कदम उठाने से हिचक रही।
कई जिलों में कानून-व्यवस्था ठप है, क्योंकि कमान की श्रृंखला टूटी हुई है। अपराधी मानते हैं कि सजा का डर नहीं। ये घटनाएं राज्य की जिम्मेदारी में चूक दिखाती हैं।
पिछले संकटों से अलग, आज का दौर कमजोर संस्थाओं और बढ़ते सांप्रदायिक जहर का मिश्रण है। मणि चक्रवर्ती की मौत अकेली नहीं—यह पूरे समुदाय के लिए खतरे की घंटी है। स्थिरता लाने के लिए तत्काल कदम जरूरी हैं।