मानवाधिकारों की रक्षा करने वाली बलोच यकजाहीती कमेटी की अगुआ सम्मी दीन बलोच ने खुलासा किया कि पाकिस्तान बलोचों के विद्रोह से नहीं, उनकी पहचान से घबराया हुआ है। क्वेटा से जारी बयान में उन्होंने राज्य की क्रूरता पर पर्दा उठाया।
एक्स प्लेटफॉर्म पर उन्होंने कहा कि बलोच हर व्यक्ति को दुश्मन समझा जाता है। नतीजा—लगातार मानवाधिकार हनन। महिलाएं, बच्चे, बूढ़े सब जबरन लापता या मारे जा रहे हैं।
आतंकवाद का ढोंग राज्य की बलोच-विरोधी कार्रवाइयों को छिपाने का हथियार है। सम्मी ने तंज कसा, गर्भवती महिलाओं और किशोरों को आतंकी कैसे कहेंगे?
बलूच नरसंहार के दावों को पाकिस्तान झूठ बताता है, लेकिन पहचान मिटाने की यह मुहिम नरसंहार ही तो है। उन्होंने कहा कि सत्ता में अब न मानवता बाकी, न कानून का डर।
सभ्य समाज दुश्मनी में भी कमजोर वर्ग बचाते हैं, पाकिस्तान भूल गया। बलूचिस्तान में प्रशासन संरक्षण में दस्ते सक्रिय हैं—गायब करने, मारने और कैद करने में।
यह लंबी ज्यादतियों की कड़ी है। सम्मी दीन बलोच का आह्वान बलूच आंदोलन को मजबूत कर रहा है, दुनिया का ध्यान खींच रहा है।