दक्षिण एशिया में नया दौर शुरू हो गया है। पाकिस्तान व चीन ने बीजिंग में विदेश मंत्रियों की बैठक में अफगानिस्तान व बांग्लादेश संग गठजोड़ मजबूत कर भारत को पटकनी देने की ठान ली है। 3-5 जनवरी की सातवीं वार्ता के संयुक्त वक्तव्य ने कूटनीतिक, आर्थिक व सुरक्षा सहयोग के विस्तार का खाका खींचा।
चीन के वांग यी व पाक के इशाक डार ने चीन-अफगान-पाक त्रिपक्षीय मंच व चीन-बांग्लादेश-पाक तंत्र को सशक्त बनाने पर सहमति जताई। बीजिंग अफगानिस्तान में शून्य योग खेल से इतर विकास व आतंकरोध पर केंद्रित है। बयान ने अफगान सर土म पर आतंकी संगठनों की मौजूदगी खत्म करने व विदेशी साजिशों पर रोक लगाने का आह्वान किया।
काबुल इससे इनकार करता है। दूसरी ओर, सीपीईसी का उन्नत संस्करण 2.0 बीआरआई के दायरे में आया, जिसमें तीसरे पक्ष को सीमित भूमिका। अफगान विस्तार से भारत की योजनाओं को चुनौती मिलेगी। पाक में बीआरआई पर कर्ज का बोझ चिंता का विषय है।
क्षेत्रीय मध्यस्थों के बाद चीन की एंट्री से भारत के लिए खतरे की घंटी बजी है। यह रणनीति समग्र बदलाव ला सकती है।