पूर्व अमेरिकी एनएसए जॉन बोल्टन ने चेतावनी दी है कि चीन अमेरिका के वेनेजुएला कदम का हवाला देकर ताइवान हथिया नहीं सकता। नई दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने ट्रंप की भारत विरोधी टैरिफ धमकी पर टिप्पणी की।
मादुरो का 2024 चुनाव धोखा और विपक्षी मारिया कोरिना मचाडो पर अत्याचार पनामा के नोरिएगा मामले की याद दिलाता है। बोल्टन बोले, गैरकानूनी शासक को चुनौती देना जायज है अगर वह खतरा बनता हो।
फिर भी, ताइवान अलग मामला है। वहां स्वतंत्र चुनाव होते हैं, लोग मुख्यभूमि से अलग रहना चाहते हैं, सर्वे यही साबित करते हैं। चीन की लंबी धमकियां वैश्विक शांति के लिए असली चुनौती हैं। रूस-यूक्रेन या ताइवान पर हमले का कोई तर्क नहीं।
ट्रंप के रूसी तेल खरीदने पर टैरिफ को बोल्टन ने गलत बताया, भारत-अमेरिका को चीन के खिलाफ करीब आना चाहिए। ग्रीनलैंड पर टिप्पणी को उन्होंने ट्रंप का मोलभाव स्टाइल कहा- चौंकाना और कम में मान लेना। लेकिन सैन्य कदम नाटो का अंत लाएगा।
बोल्टन का मानना है कि तथ्यों पर आधारित नीतियां ही सही। अधिनायकवाद के खिलाफ एकजुटता जरूरी है, न कि गलत नकल।