वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले की वैश्विक निंदा के बीच पूर्व एनएसए जॉन बोल्टन ने बचाव किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि कार्रवाई कानूनी थी और 2024 चुनावी धोखाधड़ी के खिलाफ वैध विपक्ष को मजबूती दी गई। यह 2018 का दोहराव था जब गुएडो को बढ़ावा मिला था।
बोल्टन ने साफ किया कि यह आक्रमणों की मिसाल नहीं सेट करता। असली कमजोरी ट्रंप की है—मादुरो भले गया, लेकिन तानाशाही कायम है। उनके शनिवार के बयान से साफ है कि वे आगे कदम उठाने को तैयार हैं।
ट्रंप की तेल प्राप्ति की बेचैनी मुख्य वजह थी, बोल्टन ने खुलासा किया। उनके निर्णय सौदेबाजी पर आधारित हैं, न कि स्पष्ट रणनीति पर। भविष्य के कदमों पर टिप्पणी करने में सतर्क रहना चाहिए।
अमेरिकी कंपनियों के तेल कारोबार शुरू करने के ट्रंप के सपने को बोल्टन ने फेंटेसी कहा। चावेज युग ने इंफ्रास्ट्रक्चर को नेस्तनाबूद कर दिया। बहाली के लिए खरबों डॉलर और लंबा समय लगेगा। अनिश्चितता में निवेशक पीछे हटेंगे।
नोबेल पुरस्कार की चर्चा पर बोल्टन ने कटाक्ष किया, ‘वे खुद प्रमोट करेंगे कि मादुरो उखाड़ फेंकने पर पुरस्कार बनता है, मगर मिलना मुश्किल।’ यह इंटरव्यू तेल भू-राजनीति और हस्तक्षेप की गहराइयों को रेखांकित करता है।