बांग्लादेश में राजनीतिक हलचल के बीच बीएनपी नेता तारिक रहमान ने कहा कि 1971 का मुक्ति संग्राम ही देश के वजूद का मूल है। ढाका के बीएनपी कार्यालय में डीयूएफ नेताओं से मुलाकात में उन्होंने स्पष्ट किया कि इस युद्ध के बिना बांग्लादेश की पहचान अधूरी है।
बीएसएस के हवाले से तारिक ने कहा, “मुक्ति संग्राम ने हमें राज्य और राजनीतिक ढांचा दिया। 1971 रहित बांग्लादेश की कोई सूरत नहीं।”
जनउभार के बाद बनी नई परिस्थितियों को अवसर बताते हुए उन्होंने सभी दलों से एकजुट होने को कहा। “देश के उत्थान के लिए सबको कंधे से कंधा मिलाना होगा,” उन्होंने जोड़ा। लोकतंत्र मजबूत करने पर बल दिया।
खालिदा जिया के निधन पर संवेदना व्यक्त की गई। कानून व्यवस्था पर चिंता व्यक्त हुई। निष्पक्ष चुनाव की वकालत की।
बीएसडी महासचिव बाजलुर राशिद ने पुष्टि की कि तारिक ने लौटकर मुक्ति संग्राम की महत्ता दोहराई। 25 दिसंबर को 17 साल बाद लौटे तारिक का आगमन 2026 चुनाव घोषणा से मेल खाता है।
यह वापसी अंतरिम सरकार के लिए चुनौती है। तारिक का बयान एकता और विरासत का प्रतीक है।