ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की ट्रंप की जिद ने डेनमार्क को तिलमिला दिया है। प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने चेतावनी दी कि ट्रंप को गंभीरता से लेना होगा और अगर अमेरिका नाटो के किसी अन्य सदस्य पर आक्रमण करता है, तो अंतरराष्ट्रीय संबंध पूरी तरह पटरी से उतर जाएंगे। वेनेजुएला ऑपरेशन के बाद ट्रंप का ग्रीनलैंड पर फोकस चिंता बढ़ा रहा है।
सोमवार को पॉडकास्ट इंटरव्यू में फ्रेडरिक्सन ने ट्रंप के बयान को स्व-शासित क्षेत्र पर दबाव की कोशिश बताया। ट्रंप ने कहा कि आर्कटिक रक्षा के लिए ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए अनिवार्य है। पीएम ने पलटवार किया कि डेनमार्क ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘ट्रंप धमकी देना बंद करें, ग्रीनलैंड के लोग इसका विरोध करेंगे।’ यूरोप ने सीमा सम्मान पर पूरा समर्थन दिया है।
रविवार को ट्रंप के बयान के जवाब में फ्रेडरिक्सन ने स्पष्ट कहा कि अमेरिका का ग्रीनलैंड पर कोई अधिकार नहीं। पिछले महीने ट्रंप ने विशेष दूत की नियुक्ति की, जिससे डेनमार्क-अमेरिका संबंधों में खटास आई। 2025 से ट्रंप सैन्य-आर्थिक दबाव की बात कर रहे हैं। यूरोपीय संघ ने एकजुटता दिखाई- फ्रांस ने जबरन सीमा परिवर्तन नकारा, ब्रिटेन ने ग्रीनलैंड को डेनमार्क का मामला बताया, जर्मनी ने नाटो कनेक्शन जोड़ा। ट्रंप ग्रीनलैंड विवाद, नाटो तनाव, डेनमार्क पीएम बयान जैसे टॉपिक सर्च में छाए हैं। यह घटना वैश्विक कूटनीति को नई दिशा दे सकती है।