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    Home»World»ट्रंप प्रशासन का $100,000 वीज़ा शुल्क: 20 राज्यों ने जताई कड़ी आपत्ति
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    ट्रंप प्रशासन का $100,000 वीज़ा शुल्क: 20 राज्यों ने जताई कड़ी आपत्ति

    Indian SamacharBy Indian SamacharDecember 14, 20253 Mins Read
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    अमेरिका के 20 राज्यों ने ट्रंप प्रशासन द्वारा एच-1बी वीज़ा के नए आवेदनों पर लगाए गए 100,000 डॉलर के भारी-भरकम शुल्क के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इन राज्यों का कहना है कि यह शुल्क न केवल गैरकानूनी है, बल्कि देश की आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं, जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल, के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ साबित होगा। कैलिफ़ोर्निया के अटॉर्नी जनरल, रॉब बोंटा, ने इस मुकदमे का नेतृत्व करते हुए कहा है कि यह शुल्क सार्वजनिक संस्थानों की कार्यप्रणाली को बाधित करेगा और कर्मचारियों की कमी को और गंभीर बना देगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन के पास ऐसे शुल्क लगाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

    **सार्वजनिक सेवा प्रदाताओं पर गहरा असर**

    होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने यह विवादास्पद शुल्क सितंबर 2025 से प्रभावी किया है, जो 21 सितंबर के बाद पेश किए गए एच-1बी वीज़ा आवेदनों पर लागू होता है। डीएचएस के नियम के अनुसार, सचिव के पास यह तय करने का अधिकार है कि किस आवेदन पर शुल्क लगेगा या किसे छूट मिलेगी। इसका मतलब है कि अस्पताल, स्कूल, कॉलेज और अन्य सार्वजनिक संस्थान जो कुशल विदेशी श्रमिकों पर निर्भर करते हैं, उन्हें इस नए शुल्क का सामना करना पड़ेगा, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है।

    **कानूनी चुनौती और औचित्य**

    इन राज्यों ने अपने मुकदमे में तर्क दिया है कि यह शुल्क प्रशासनिक प्रक्रिया अधिनियम और अमेरिकी संविधान के प्रावधानों के विपरीत है। अब तक, एच-1बी वीज़ा से संबंधित शुल्क केवल प्रशासनिक खर्चों को कवर करने के लिए थे। राज्यों का कहना है कि 100,000 डॉलर का शुल्क कांग्रेस द्वारा निर्धारित सीमाओं का उल्लंघन करता है और उन्होंने इस नई नीति को लागू करने से पहले आवश्यक विधायी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया है। एच-1बी वीज़ा कार्यक्रम अमेरिकी कंपनियों को उच्च-कुशल विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति देता है, जिसमें प्रति वर्ष 65,000 वीज़ा और उन्नत डिग्री वाले स्नातकों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीज़ा की सीमा है। हालांकि, सार्वजनिक संस्थानों को अक्सर इस सीमा से छूट प्राप्त होती है।

    राज्यों की चिंता है कि इस शुल्क से कर्मचारियों की कमी की समस्या और बढ़ेगी। शिक्षा क्षेत्र में, 2024-2025 के दौरान 74% स्कूल जिलों को विशेष शिक्षा, विज्ञान, अंग्रेजी भाषी शिक्षण (ESL) और विदेशी भाषा के शिक्षकों को नियुक्त करने में कठिनाई हुई। स्वास्थ्य सेवा में, 2024 में चिकित्सा और स्वास्थ्य से संबंधित व्यवसायों के लिए लगभग 17,000 एच-1बी वीज़ा जारी किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में डॉक्टर और सर्जन शामिल थे। भविष्य के अनुमानों के अनुसार, 2036 तक अमेरिका में 86,000 डॉक्टरों की कमी हो सकती है।

    **विभिन्न राज्यों का संयुक्त प्रयास**

    यह मुकदमा कैलिफ़ोर्निया और मैसाचुसेट्स के नेतृत्व में है, जिसमें एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, हवाई, इलिनोइस, मैरीलैंड, मिशिगन, मिनेसोटा, नेवादा, उत्तरी कैरोलिना, न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क, ओरेगन, रोड आइलैंड, वर्मोंट, वाशिंगटन और विस्कॉन्सिन के अटॉर्नी जनरल भी शामिल हुए हैं। एच-1बी वीज़ा, विशेष रूप से भारतीय पेशेवरों के लिए, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और अकादमिक अनुसंधान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एक जीवन रेखा है। राज्यों का मानना है कि यह नया शुल्क आवश्यक प्रतिभाओं की उपलब्धता को बाधित करेगा, जो सार्वजनिक सेवाओं और देश की आर्थिक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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