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    ग्रांडिपॉटी रासपुतिन: गोली, ज़हर और बर्फीली नदी की मौत

    Indian SamacharBy Indian SamacharNovember 18, 20253 Mins Read
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    इतिहास की सबसे अजीब और अनसुलझी हत्याओं में से एक है ग्रिगरी रासपुतिन की मौत, जिसे “पागल साधु” के नाम से जाना जाता था। यह रहस्यमयी शख्स, जिसकी साइबेरियाई जड़ें थीं, ने अपनी कथित अलौकिक शक्तियों से रूसी शाही परिवार, रोमनोव, पर गहरा प्रभाव जमा लिया था। दिसंबर 1916 की एक सर्द रात को, सेंट पीटर्सबर्ग के मोइका पैलेस में, साजिशकर्ताओं के एक समूह ने उसे मारने का एक भयावह षड्यंत्र रचा, जिसकी कहानी आज भी किंवदंती बन चुकी है।

    **हत्या का दोहरा पक्ष: सच्चाई बनाम अफसाना**

    रासपुतिन की मौत की कहानी दो विपरीत बयानों में बंटी हुई है: वैज्ञानिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और साजिशकर्ताओं की विस्तृत, नाटकीय यादें।

    * **ऑटोप्सी रिपोर्ट:** यह बताती है कि रासपुतिन को सिर में एक गोली लगी थी और उसकी मृत्यु तुरंत हो गई।
    * **साजिशकर्ताओं का किस्सा:** यह एक लंबी, खतरनाक और लगभग असंभव लगने वाली हत्या का वर्णन करता है, जिसमें कई प्रयास शामिल थे।

    **ज़हर का पानी और पहली नाकाम गोली**

    हत्या की योजना रचने वाले राजकुमार फेलिक्स युसुपोव के अनुसार, रासपुतिन को दिए गए सायनाइड ज़हर का उस पर कोई असर नहीं हुआ।

    * **सायनाइड युक्त भोजन:** रासपुतिन को चाय और केक परोसे गए, जिन्हें सायनाइड से भरपूर बनाया गया था, लेकिन उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
    * **विषैली शराब:** इसके बाद, उसे सायनाइड मिलाई हुई शराब पिलाई गई, लेकिन वह तब भी सामान्य रहा, जिसने हमलावरों को आश्चर्यचकित कर दिया।

    लगभग 2:30 बजे के बाद, युसुपोव ने रासपुतिन को सीने में गोली मार दी, यह सोचकर कि वह मर गया है।

    **’पुनर्जीवित’ रासपुतिन और अंतिम प्रतिरोध**

    जब युसुपोव और उसके साथी यह सुनिश्चित करने लौटे कि रासपुतिन मर गया है, तो उन्हें एक चौंकाने वाला दृश्य मिला।

    * **अविश्वसनीय वापसी:** युसुपोव ने देखा कि रासपुतिन की पलकें हिल रही हैं। अचानक, रासपुतिन ने “जानवर की तरह” गुर्राते हुए युसुपोव पर हमला कर दिया और उसका गला पकड़ लिया।
    * **भागने का प्रयास:** रासपुतिन सीढ़ियों से भागकर यार्ड में चला गया, जहाँ व्लादिमीर पुरिश्केविच सहित अन्य साजिशकर्ताओं ने उसका पीछा किया।
    * **निर्णायक गोली:** पुरिश्केविच ने रासपुतिन को सिर में एक गोली मारी, जिससे वह आखिरकार गिर पड़ा।
    * **नेवा नदी में अंत:** शरीर को भारी कालीनों और जंजीरों में लपेटकर ठंडी नेवा नदी में फेंक दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, अत्यधिक ठंड (हाइपोथर्मिया) ही उसकी मृत्यु का अंतिम कारण बनी।

    **शाही दरबार में रासपुतिन का दबदबा**

    साइबेरिया का एक साधारण किसान होने के बावजूद, रासपुतिन ने अपनी रहस्यमयी आभा और कथित चमत्कारी शक्तियों के दम पर सेंट पीटर्सबर्ग के कुलीन समाज में जगह बना ली।

    * **ज़ार से मुलाकात:** उसने अपनी पहुंच का इस्तेमाल करके ज़ार निकोलस द्वितीय और ज़ारिना एलेक्जेंड्रा से मुलाकात की।
    * **उत्तराधिकारी का इलाज:** ज़ारिना का बेटा एलेक्सी हीमोफिलिया से पीड़ित था, और रासपुतिन ने अपनी शक्ति से उसके दर्द को कम करने का दावा किया, जिससे वह शाही परिवार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया।
    * **राजनीतिक हस्तक्षेप:** रासपुतिन के प्रभाव ने रोमनोव शासन को कमजोर करने वाली राजनीतिक सलाह को जन्म दिया।

    **क्रांति का बीज और रासपुतिन की भविष्यवाणी**

    माना जाता है कि रासपुतिन की हत्या ने राजशाही को बचाने के बजाय, रूसी क्रांति के लिए मंच तैयार किया।

    * **शापित भविष्यवाणी:** कहा जाता है कि मरने से पहले रासपुतिन ने कहा था, “जो कोई भी मुझे नुकसान पहुंचाएगा, उसका अंत बुरा होगा।”
    * **जनता का आक्रोश:** उसकी मृत्यु के बाद, जनता का गुस्सा सीधा ज़ार पर केंद्रित हो गया, क्योंकि अब कोई ‘बलि का बकरा’ नहीं बचा था।

    यूसुपोव और अन्य को निर्वासित किया गया, लेकिन रासपुतिन की मौत ने जनता और ज़ार के बीच की खाई को और चौड़ा कर दिया। 1917 की क्रांति ने रोमनोव राजवंश का अंत कर दिया।

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