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    Home»World»अफगानिस्तान की जमीन पर किसी को पैर नहीं रखने देंगे: तालिबान
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    अफगानिस्तान की जमीन पर किसी को पैर नहीं रखने देंगे: तालिबान

    Indian SamacharBy Indian SamacharNovember 9, 20253 Mins Read
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    अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच चल रही शांति वार्ता टूटने की कगार पर है, जिसके चलते तालिबान सरकार ने इस्लामाबाद को कड़े शब्दों में चेतावनी जारी की है। अफगानिस्तान के इस्लामिक अमीरात ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी देश को अपनी जमीन का इस्तेमाल शत्रुतापूर्ण गतिविधियों के लिए नहीं करने देगा और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

    तालिबान के आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार, “अफगानिस्तान की भूमि और लोगों की रक्षा इस्लामिक और राष्ट्रीय दोनों ही कर्तव्य हैं।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अफगानिस्तान किसी भी प्रकार के आक्रमण का जवाब देगा और अपनी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। यह रुख अफगानिस्तान के क्षेत्र को किसी भी बाहरी खतरे के खिलाफ एक अभेद्य किले के रूप में स्थापित करता है।

    इस्लामिक अमीरात ने कहा कि अफगानिस्तान किसी भी देश के खिलाफ अपनी धरती का इस्तेमाल नहीं होने देगा, और न ही किसी को अफगानिस्तान की संप्रभुता या सुरक्षा को चुनौती देने की अनुमति देगा। यह दोहरा मापदंडों के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश है।

    तालिबान ने वार्ता में मध्यस्थता के लिए तुर्की और कतर के प्रयासों की सराहना की, जो इन दोनों देशों के साथ अच्छे संबंधों को दर्शाता है।

    पाकिस्तान पर गंभीर आरोप
    तालिबान का यह बयान ऐसे समय आया है जब काबुल ने पाकिस्तान के कुछ सैन्य तत्वों पर अफगानिस्तान की स्थिरता को नुकसान पहुंचाने वाली नीतियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। तालिबान का दावा है कि पाकिस्तान के कुछ सैन्य अधिकारी “बनावटी बहाने” बनाकर अफगानिस्तान में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि वे एक मजबूत और स्थिर अफगानिस्तान को अपने राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध मानते हैं।

    उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के कुछ सैन्य अधिकारी अफगानिस्तान की सुरक्षा, स्थिरता और विकास को अपने लक्ष्यों के लिए खतरा समझते हैं।” तालिबान ने इन तत्वों पर मौजूदा अस्थिरता का फायदा उठाकर क्षेत्रीय शांति भंग करने का भी आरोप लगाया।

    सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच
    हाल ही में, अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर दोनों देशों के बीच घातक झड़पें हुई हैं, जिनमें कई लोगों की जान गई है। 9 अक्टूबर को काबुल में हुए विस्फोटों के बाद यह तनाव और बढ़ा, जो उसी दिन हुआ जब तालिबान विदेश मंत्री भारत में थे। कतर के हस्तक्षेप के बाद 19 अक्टूबर को एक संघर्ष विराम हुआ, लेकिन यह अभी भी बेहद नाजुक स्थिति में है।

    तालिबान ने पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के “गैर-जिम्मेदाराना” रवैये पर निराशा व्यक्त की, जिसे वे वार्ता की विफलता का कारण मानते हैं। हालांकि, उन्होंने पाकिस्तान के लोगों के प्रति भाईचारे की भावना व्यक्त की और शांति की उम्मीद जताई।

    टीटीपी पर लगे आरोपों का खंडन
    पाकिस्तान द्वारा तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के बढ़ते प्रभाव को तालिबान की सत्ता वापसी से जोड़ने के आरोपों को अफगानिस्तान के इस्लामिक अमीरात ने “निराधार” कहकर खारिज कर दिया है।

    तालिबान प्रवक्ता ने तर्क दिया कि पाकिस्तान में उग्रवाद कोई नई समस्या नहीं है और 2021 से पहले भी बड़ी घटनाएं हुई थीं। उन्होंने कहा, “यह पाकिस्तान की आंतरिक समस्या है, न कि इस्लामिक अमीरात की वजह से उत्पन्न हुई है।”

    काबुल द्वारा उठाए गए सुरक्षा कदम
    तालिबान सरकार ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें धार्मिक और राजनीतिक नेताओं के बीच संवाद को बढ़ावा देना, डूरंड लाइन के पास रहने वाले जनजातीय शरणार्थियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना और शरणार्थी शिविरों में हथियार रखने पर कड़ा प्रतिबंध लगाना शामिल है।

    जैसे-जैसे राजनयिक प्रयास कमजोर पड़ रहे हैं और सीमा पर तनाव गहराता जा रहा है, तालिबान की यह चेतावनी क्षेत्रीय संबंधों की अनिश्चितता और भविष्य में हिंसा को रोकने की चुनौती को और अधिक स्पष्ट करती है।

    Afghanistan Border Tensions Islamabad Islamic Emirate Kabul Pakistan Peace Talks Regional Security Taliban TTP
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