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    Home»World»शून्यवादी हिंसक अतिवाद: अमेरिका में जनसंहारों का बढ़ता खतरा
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    शून्यवादी हिंसक अतिवाद: अमेरिका में जनसंहारों का बढ़ता खतरा

    Indian SamacharBy Indian SamacharOctober 16, 20254 Mins Read
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    अमेरिका में हाल के जनसंहार (mass shootings) की घटनाओं ने कानून प्रवर्तन और अभियोजकों का ध्यान एक नई और चिंताजनक प्रवृत्ति की ओर खींचा है: ‘शून्यवाद हिंसक अतिवाद’ (Nihilistic Violent Extremism – NVE)। हालांकि यह शब्द अपेक्षाकृत नया है, लेकिन इसके पीछे की विचारधारा और इसके द्वारा फैलाई जा रही हिंसा कोई नई बात नहीं है। इस शब्द का पहली बार प्रयोग तब हुआ जब विस्कॉन्सिन के एक किशोर, निकिता कैसैप, की गतिविधियों की जांच की गई। कैसैप पर कथित तौर पर अपने परिवार की हत्या करने और राजनीतिक उथल-पुथल मचाने की योजना बनाने का आरोप है, जिसका मकसद ‘श्वेत नस्ल’ को बचाना था।

    एक संघीय अधिकारी के अनुसार, “शून्यवाद हिंसक अतिवादी समाज के प्रति तीव्र घृणा से प्रेरित होते हैं और वे व्यापक अराजकता फैलाकर उसे नष्ट करना चाहते हैं।” ये व्यक्ति अक्सर ऑनलाइन समुदायों से प्रेरणा लेते हैं और उसे अपनी हिंसक गतिविधियों में बदल देते हैं। उनकी विचारधारा किसी विशेष राजनीतिक झुकाव, जैसे कि श्वेत वर्चस्व या सरकार विरोधी अतिवाद, तक सीमित नहीं रहती। उनका मुख्य लक्ष्य केवल विनाश और अस्थिरता पैदा करना होता है।

    नेशनल काउंटरटेररिज्म इनोवेशन, टेक्नोलॉजी एंड एजुकेशन सेंटर (NCITE) ने ऐसे दो दर्जन से अधिक संघीय मामलों का दस्तावेजीकरण किया है, जो इस ‘शून्यवाद हिंसक अतिवाद’ की श्रेणी में आते हैं। इनमें हाल ही में मिनियापोलिस में एक चर्च में हुई गोलीबारी की घटना भी शामिल है।

    **’शून्यवाद’ और हिंसा का गहरा संबंध:**

    ‘शून्यवाद’ (Nihilism) का दार्शनिक अर्थ है कि जीवन का कोई अर्थ या मूल्य नहीं है। हिंसक अतिवादी अक्सर किसी खास सरकारी नीति में बदलाव चाहते हैं, लेकिन शून्यवाद हिंसक अतिवादियों का कोई स्पष्ट लक्ष्य नहीं होता। वे हिंसा को एक खेल की तरह देखते हैं और उसके माध्यम से अराजकता फैलाना चाहते हैं।

    संघीय मामलों में इस शब्द का प्रयोग पिछले कुछ महीनों में बढ़ा है। एफबीआई निदेशक ने भी इस बात पर जोर दिया है कि देश में चल रही हजारों घरेलू आतंकवाद की जांचों में एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘शून्यवाद हिंसक अतिवाद’ से जुड़ा है। इन व्यक्तियों का समाज के प्रति गहरा odio और उसे नष्ट करने की तीव्र इच्छा होती है।

    अप्रैल में, न्याय विभाग ने ‘764’ नामक एक ऑनलाइन नेटवर्क को ‘शून्यवाद हिंसक अतिवादी नेटवर्क’ करार दिया था, जब बच्चों को निशाना बनाने के आरोप में गिरफ्तारी हुई थी। इस नेटवर्क का उद्देश्य सामाजिक अव्यवस्था फैलाना और अमेरिकी सरकार को गिराना था। इसी तरह, ओरेगन के एक किशोर पर भी इसी विचारधारा से प्रेरित होकर जनसंहार की योजना बनाने का आरोप है।

    **विशेषज्ञों की चिंताएं और विश्लेषण:**

    विशेषज्ञों का मानना ​​है कि कई हिंसक अतिवादी विभिन्न विचारधाराओं का एक मिश्रण अपनाते हैं। जैसा कि पूर्व एफबीआई निदेशक ने कहा था, उनकी प्रेरणा सिर्फ हिंसा होती है, चाहे वह किसी भी विचारधारा से प्रेरित क्यों न हो। यूनाइटेड किंगडम में, ऐसे अतिवादियों के लिए “कम्पोजिट वायलेंट एक्सट्रीमिज्म” शब्द का प्रयोग किया जाता है, जो कई मिश्रित या अस्पष्ट विचारधाराओं को दर्शाता है।

    एंटी-डिफेमेशन लीग (ADL) के विशेषज्ञ ओरन सेगल के अनुसार, NVE शब्द उन लोगों को परिभाषित करने में सहायक है जो अराजकता फैलाने के उद्देश्य से कार्य करते हैं। ADL ने उन जनसंहारों का भी उल्लेख किया है जिनके शूटर ऑनलाइन उन समुदायों में सक्रिय थे जो सामूहिक हत्याओं को बढ़ावा देते थे।

    शोधकर्ता मार्क-आंद्रे अर्जेंटीना का कहना है कि NVE एक ‘कन्वर्जेंस थ्रेट’ (convergence threat) है, जो विभिन्न तत्वों जैसे उपसंस्कृति, त्वरणवाद (accelerationism) और साइबर-उत्पीड़न का मेल है। इनकी मुख्य ताकत इनकी लचीलापन और किसी भी स्पष्ट विचारधारा की कमी है। ये लोग आसानी से हमलों को अंजाम देने के तरीके साझा करते हैं, जैसे कि चाकू, वाहन या ऑनलाइन हमले। इनका लक्ष्य कम संसाधनों का उपयोग करके बड़े पैमाने पर अराजकता और अव्यवस्था फैलाना है।

    **अतिवाद को समझने में चुनौतियां:**

    विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ‘शून्यवाद हिंसक अतिवाद’ शब्द का अत्यधिक उपयोग भ्रम पैदा कर सकता है और खतरों के मूल स्रोतों को छिपा सकता है। यदि सभी प्रकार की हिंसक गतिविधियों को इसी श्रेणी में डाल दिया जाएगा, तो यह समझना मुश्किल हो जाएगा कि ये खतरे वास्तव में कहां से उत्पन्न हो रहे हैं। यह लेबल श्वेत वर्चस्व जैसी अन्य महत्वपूर्ण विचारधाराओं को भी नजरअंदाज कर सकता है, जिससे समस्या की जड़ को समझने में बाधा आ सकती है।

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