अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में गाजा युद्ध को तुरंत बंद करने की अपील की और फिर अरब तथा मुस्लिम देशों के प्रमुख नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य समाधान खोजना था, और यह ऐसे समय में हुई जब वॉशिंगटन पर मध्य पूर्व की कूटनीति को संभालने का दबाव बढ़ गया है। इजराइल-हमास युद्ध ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है, जिससे अमेरिका को अपने अरब सहयोगियों के साथ मिलकर एक ठोस रास्ता निकालने की आवश्यकता है। बैठक के बाद ट्रंप ने सीधे पत्रकारों से बात करने से परहेज किया, और सिर्फ हाथ हिलाकर निकल गए। हालांकि, उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने संकेत दिया कि बातचीत सकारात्मक रही। बैठक में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, मिस्र, जॉर्डन, तुर्की, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के नेता शामिल हुए। चर्चा का मुख्य विषय गाजा में स्थायी युद्धविराम, बंधकों की सुरक्षित रिहाई और मानवीय सहायता था। ट्रंप ने बैठक से पहले कहा कि यह बैठक अहम है क्योंकि युद्ध बहुत लंबा चल रहा है और इसे खत्म होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बंधकों की रिहाई और गाजा में मानवीय संकट पर तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोआन ने इसे फलदायी बताया और कहा कि एक साझा घोषणा पत्र जल्द ही जारी किया जाएगा, लेकिन उन्होंने विवरण नहीं दिया। बैठक में फिलिस्तीन पर क्या बात हुई, इसकी कोई जानकारी नहीं है। ट्रंप ने UNGA में कहा था कि फिलिस्तीन को मान्यता देना हमास को इनाम देने जैसा होगा। उन्होंने कहा कि हमास ने बार-बार शांति प्रयासों को नकारा है, और बंधकों को वापस लाना होगा। बैठक के ठोस परिणाम सामने नहीं आए, लेकिन अरब देशों में गाजा युद्ध रोकने को लेकर गंभीरता बढ़ी है, और बंधकों की रिहाई व मानवीय सहायता पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले समय में देखना होगा कि यह बैठक गाजा युद्ध को रोकने में कितनी सफल होती है।
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