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    एससीओ समिट: मोदी, जिनपिंग और पुतिन की बैठक, ट्रंप के लिए कूटनीतिक चुनौती

    Indian SamacharBy Indian SamacharAugust 31, 20255 Mins Read
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    भारत की कूटनीतिक रणनीति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। जापान से लेकर चीन तक, यह रणनीति समझौतों, विज़न और आंकड़ों के माध्यम से स्पष्ट हो रही है। महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के साथ व्यापारिक नीतियों को लेकर टकराव रखने वाले ट्रंप को इससे परेशानी होगी। दो दिन की जापान यात्रा के बाद, प्रधान मंत्री मोदी चीन पहुंच गए हैं। अब, प्रधान मंत्री मोदी, रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक मंच पर मुलाकात करेंगे।

    आइए, हम तीन प्रमुख कूटनीतिक पहलुओं- डील, डिप्लोमेसी और डिसीजन- को समझते हैं। साथ ही, यह भी जानते हैं कि भारत कैसे ट्रंप की व्यापारिक नीतियों को चुनौती देने के लिए रणनीति बना रहा है और अमेरिका के व्यापारिक प्रभुत्व को कम करने के लिए नए रास्ते तलाश रहा है।

    कुछ ही घंटों में चीन के तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन शुरू होने वाला है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर, प्रधानमंत्री मोदी चीन पहुंचे हैं, जिसका मतलब है कि मंच तैयार है और सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। अब बस उस समय का इंतजार है जब प्रधान मंत्री मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति पुतिन एक साथ होंगे।

    इस बैठक से अमेरिका को ईर्ष्या होने की संभावना है। भारत, चीन और रूस के बीच यह वार्ता, विशेष रूप से अमेरिका के लिए, दुनिया को एक मजबूत संदेश देगी। एससीओ में कूटनीति के मंच पर क्या होने वाला है? इसे 10 मुख्य बिंदुओं में समझें:

    1. एससीओ शिखर सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन में आयोजित किया जाएगा।
    2. एससीओ शिखर सम्मेलन चीन के तियानजिन शहर में होगा।
    3. इस शिखर सम्मेलन में प्रधान मंत्री मोदी, पुतिन और जिनपिंग भाग लेंगे।
    4. रविवार को, प्रधान मंत्री मोदी और जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक होगी।
    5. इस बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
    6. टैरिफ और व्यापार सहित कई मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।
    7. 1 सितंबर को प्रधान मंत्री मोदी और पुतिन के बीच बैठक होगी।
    8. एससीओ शिखर सम्मेलन से पहले, पुतिन ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया।
    9. पुतिन ने कहा कि एससीओ सदस्य देश वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए मिलकर काम करेंगे।
    10. पुतिन ने यह भी कहा कि एससीओ देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाया जाएगा।

    ट्रेड के नाम पर दादागीरी नहीं चलेगी

    इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य अमेरिका को यह स्पष्ट करना है कि अब व्यापार के नाम पर दादागीरी नहीं चलेगी, क्योंकि भारत, रूस और चीन दुनिया की तीन प्रमुख शक्तियां हैं। सवाल यह है कि क्या भारत और चीन पुराने विवादों को भुलाकर दोस्ती की राह पर आगे बढ़ेंगे? यह केवल समझौतों और कूटनीति का मंच नहीं है, बल्कि यह ट्रंप के लिए एक संदेश, एक सीख है… यह डील, डिप्लोमेसी और डिसीजन ट्रंप के लिए एक चुनौती होंगे।

    भारत, रूस और चीन टैरिफ का काट खोजेंगे

    एससीओ शिखर सम्मेलन पर अमेरिका की नज़र रहेगी, क्योंकि यह ऐसे समय में हो रहा है जब टैरिफ को लेकर माहौल तनावपूर्ण है। ऐसे में, भारत, रूस और चीन मिलकर अमेरिका के टैरिफ युद्ध का हल ढूंढ सकते हैं। अमेरिका इस सम्मेलन में शामिल नहीं होगा, लेकिन ट्रंप के करीबी सहयोगी, पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शाहबाज शरीफ इसमें शामिल होंगे। बीजिंग इस सप्ताह दो प्रमुख कार्यक्रमों की मेजबानी करने वाला है।

    चीन ने 26 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया

    पहला कार्यक्रम एससीओ शिखर सम्मेलन है। इसके बाद, बीजिंग में विजय दिवस परेड भी होगी, जिसमें भारत शामिल नहीं होगा, लेकिन 26 से अधिक देशों के नेता भाग लेंगे। चीन ने बीजिंग में विजय दिवस परेड के लिए 26 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रधानमंत्रियों को आमंत्रित किया है। इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान शामिल हैं।

    परेड में चीन का शक्ति प्रदर्शन

    इस परेड में चीन 100 से अधिक लड़ाकू विमान, मिसाइलों और टैंकों के साथ अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेगा। यह विजय परेड द्वितीय विश्व युद्ध में जापान पर जीत की याद में आयोजित की जाती है। भारत जापान को अपना करीबी सहयोगी मानता है। प्रधान मंत्री मोदी जापान दौरे के बाद चीन गए। इस प्रकार, उन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों को संतुलित किया है।

    भारत और जापान के बीच महत्वपूर्ण समझौते

    भारत और जापान के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं, जिनका उल्लेख आवश्यक है। जापान से ऐसी तस्वीरें आई हैं जो दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों की गवाही देती हैं। प्रधान मंत्री मोदी ने जापान दौरे के दौरान कहा कि जापान प्रौद्योगिकी का केंद्र है और भारत प्रतिभा का केंद्र है। इसका एक प्रमाण तब मिला जब प्रधान मंत्री मोदी ने दौरे के दूसरे दिन जापान की बुलेट ट्रेन की सवारी की। उनके साथ जापान के प्रधान मंत्री शिगेरू इशिबा भी थे।

    बुलेट ट्रेन से जुड़ी खास बातें

    जापान की E10 शिंकानसेन बुलेट ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है। विशेष रूप से, जापान की E10 शिंकानसेन ट्रेन को भारत में भी लाने की तैयारी की जा रही है। भारत और जापान संयुक्त रूप से इस उन्नत बुलेट ट्रेन को शुरू करने की योजना बना रहे हैं। इसे मुंबई और अहमदाबाद के बीच बनाए जा रहे हाई स्पीड कॉरिडोर पर चलाया जाएगा। रिपोर्टों के अनुसार, जापान सरकार भारत को 2 बुलेट ट्रेन उपहार में देगी।

    भारत और जापान की चंद्रयान-5 साझेदारी

    भारत और जापान की दोस्ती का एक उदाहरण चंद्रयान-5 साझेदारी भी है। भारत और जापान के बीच एक समझौते के तहत, चंद्रयान-5 को जापानी रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी संयुक्त रूप से काम करेंगे।

    चंद्रयान-5 मिशन की प्रमुख विशेषताओं की बात करें, तो इस मिशन को जापानी एजेंसी के H3-24L लॉन्च वाहन का उपयोग करके लॉन्च किया जाएगा। इसरो कुछ विशेष वैज्ञानिक उपकरण भी विकसित करेगा। चंद्रयान-5 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का एक प्रस्तावित चंद्र मिशन है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर फिर से सॉफ्ट लैंडिंग करना और वहां वैज्ञानिक अध्ययन करना है।

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