चीन के विदेश मंत्री वांग यी 18-19 अगस्त को भारत दौरे पर रहे, जो एनएसए अजीत डोभाल के निमंत्रण पर आयोजित हुआ। इस यात्रा के दौरान, वांग यी और डोभाल ने 19 अगस्त को सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों की 24वीं वार्ता की सह-अध्यक्षता की। वांग यी ने एस. जयशंकर और प्रधानमंत्री मोदी से भी मुलाकात की, जिसके बारे में विदेश मंत्रालय ने विस्तृत जानकारी दी। इसमें वांग यी की यात्रा के दौरान हुए महत्वपूर्ण समझौते शामिल थे। भारत और चीन ने इस बात पर सहमति जताई कि 23वीं वार्ता के बाद से सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनी हुई है। सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए विशेषज्ञ समूह और कार्य समूह का गठन किया जाएगा। राजनयिक और सैन्य स्तरों पर सीमा प्रबंधन प्रणाली को सक्रिय किया जाएगा। अगली वार्ता चीन में होगी। वांग यी की यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को लेकर भी सहमति बनी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वांग यी के बीच हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी। विदेश मंत्रालय ने बताया कि एस. जयशंकर और वांग यी की बैठक में भारत-चीन संबंधों को स्थिर और सहयोगी बनाने पर जोर दिया गया। चीन ने एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भागीदारी का स्वागत किया। भारत ने चीन की अध्यक्षता का समर्थन किया। दोनों पक्षों ने ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी में एक-दूसरे का सहयोग करने पर सहमति जताई। दोनों देशों के बीच जल्द ही सीधी उड़ानें शुरू करने और वीजा सुविधाओं को सरल बनाने पर सहमति बनी। 2026 में भारत में तीसरी बैठक आयोजित की जाएगी, और 2025 में भारत-चीन राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी। कैलाश-मानसरोवर यात्रा 2026 पर भी चर्चा हुई, जिसे फिर से शुरू किया जाएगा और विस्तारित किया जाएगा। विदेश मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि सीमा पार नदियों पर सहयोग और जल संबंधी सूचनाओं को साझा करने पर सहमति बनी है। इसके अतिरिक्त, दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे, जिसमें लिपुलेख, शिपकी ला और नाथू ला दर्रों से सीमा व्यापार को फिर से शुरू करना शामिल है।
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