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    Home»World»पुतिन-ट्रंप मीटिंग: क्या यूक्रेन युद्ध रुकेगा? EU और NATO की चिंता
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    पुतिन-ट्रंप मीटिंग: क्या यूक्रेन युद्ध रुकेगा? EU और NATO की चिंता

    Indian SamacharBy Indian SamacharAugust 10, 20255 Mins Read
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    यूरोपीय देश रूसी राष्ट्रपति पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाली संभावित मुलाकात को लेकर चिंतित हैं। उनकी चिंता इस बात को लेकर है कि ट्रंप, पुतिन की शर्तों को मानने के लिए यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की पर दबाव डाल सकते हैं, जिससे रूस को फायदा होगा। यूरोपीय संघ को डर है कि युद्ध के बाद पुतिन यूरोप में अपना अभियान शुरू कर सकते हैं, इसलिए वे यूक्रेन युद्ध को रोकने की किसी भी कोशिश को विफल करने की कोशिश कर रहे हैं।

    पुतिन-ट्रंप की बैठक 15 अगस्त को हो सकती है, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति का आखिरी दांव माना जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि यह बैठक रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम समझौते को अंतिम रूप दे सकती है। डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि इस बैठक के बाद युद्धविराम तय है, लेकिन यूरोपीय देश इससे चिंतित हैं। इस बैठक से पहले, यूरोपीय देश यूक्रेन और अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठक करने वाले हैं।

    अमेरिका, यूक्रेन और यूरोपीय देशों के प्रतिनिधि ब्रिटेन में बैठक करेंगे। यह बैठक ट्रंप और पुतिन के बीच होने वाली बैठक से पहले आयोजित की जाएगी। बैठक में युद्धविराम की शर्तों पर चर्चा होगी। यूरोपीय देशों को डर है कि ट्रंप उन्हें दरकिनार कर पुतिन के साथ शांति समझौता कर सकते हैं और ज़ेलेंस्की पर दबाव डाल सकते हैं कि वह युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर करें।

    यूरोपीय देश इस बैठक के जरिए ट्रंप पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह भी माना जा रहा है कि यूरोपीय देश ज़ेलेंस्की के साथ गुप्त बातचीत कर रहे हैं और उन्हें ट्रंप-पुतिन की शर्तों पर सहमत न होने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं। यूरोपीय देश यह भी आश्वासन दे रहे हैं कि वे यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति जारी रखेंगे, भले ही अमेरिका पीछे हट जाए।

    कुछ रिपोर्टों के अनुसार, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस जैसे देश किसी भी कीमत पर युद्धविराम नहीं चाहते हैं और वे पुतिन के पूर्ण आत्मसमर्पण तक युद्ध जारी रखना चाहते हैं। लेकिन सवाल यह है कि यूरोप युद्धविराम से क्यों भाग रहा है? इसका कारण यह है कि यूरोपीय देश रूस से खतरे को महसूस कर रहे हैं। उन्हें डर है कि अगर रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म हो गया, तो पुतिन यूरोप के खिलाफ एक अभियान शुरू कर सकते हैं, जिसकी शुरुआत सुवालकी गैप से हो सकती है।

    अगर रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम होता है, तो पुतिन सुवालकी गैप पर कब्जा कर सकते हैं और यूरोप में अपना अभियान शुरू कर सकते हैं। वह सबसे पहले 65 किलोमीटर लंबे गलियारे पर कब्जा करेंगे, जो रूस के कैलिनिनग्राद को बेलारूस से जोड़ता है। इन दावों का आधार बेलारूस में रूस की 71वीं डिवीजन की तैनाती है। यह डिवीजन 2024 में बनाई गई थी। ऐसा कहा जाता है कि इस डिवीजन के लगभग 5000 सैनिक बेलारूस में तैनात हैं। इन सैनिकों को सुवालकी गैप के आसपास तैनात किया गया है। इस डिवीजन के सैनिकों को खतरनाक माना जाता है।

    71वीं डिवीजन वास्तव में रूसी सेना की 200वीं मोटर राइफल डिवीजन का पुनर्गठन है। इसी डिवीजन के सैनिकों ने 2014 में क्रीमिया पर कब्जा किया था और 2022 में खारकीव पर कब्जा करने में भी उनकी अहम भूमिका थी। अब रूस ने सुवालकी गैप पर कब्जा करने की जिम्मेदारी इन्हीं सैनिकों को सौंपी है। रूस एक तरफ सुवालकी गैप पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ लिथुआनिया पर हमला करने की तैयारी कर रहा है। ऐसा यहां रूस की बढ़ती गतिविधियों के कारण है।

    लिथुआनिया के समुद्री क्षेत्र में रूस की घुसपैठ लगातार बढ़ रही है। हाल ही में रूस का एक अंडरवाटर ड्रोन NIDA के पास देखा गया। ऐसा कहा जाता है कि यह ड्रोन रूस के कैलिनिनग्राद से आया था। पिछले महीने भी इसी इलाके में रूस का एक अंडरवाटर ड्रोन देखा गया था। ऐसा माना जा रहा है कि बेलारूस पुतिन के यूरोप अभियान में सक्रिय रूप से भाग ले सकता है, क्योंकि बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने यूरोपीय देशों को धमकी दी है।

    लुकाशेंको ने एक साक्षात्कार में रूस-यूक्रेन युद्ध के बारे में तीन बातें कहीं। पहला, बेलारूस युद्ध की तैयारी कर रहा है। दूसरा, अगर ज़ेलेंस्की कीव को बचाना चाहते हैं, तो उन्हें आत्मसमर्पण करना होगा। तीसरा, बेलारूस में रूसी सैन्य ठिकानों के लिए स्थान तय किए गए हैं। लुकाशेंको का यह रुख यूक्रेन के साथ-साथ यूरोप के लिए भी एक चेतावनी है। लुकाशेंको ने यह भी कहा कि अगर रूस हार जाता है, तो सभी को इसकी कीमत चुकानी होगी।

    लुकाशेंको ने कहा कि रूस नहीं हारेगा। हार हम सभी के लिए बहुत महंगी होगी। इसलिए, दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु शस्त्रागार वाला यह परमाणु शक्ति संपन्न देश नहीं हारेगा, लेकिन यूक्रेन हार सकता है। यही कारण है कि यूरोपीय देश रूस को यूक्रेन युद्ध में उलझाए रखना चाहते हैं, जिसके लिए ज़ेलेंस्की को युद्धविराम से इनकार करना होगा। यूरोपीय देश ज़ेलेंस्की को मनाने के लिए हथियारों की आपूर्ति भी जारी रखेंगे।

    यूरोपीय संघ ने यूक्रेन को 274 अरब रुपये की मदद देने की घोषणा की है, जिससे यूक्रेन को नए हथियार मिलेंगे। पुतिन इस योजना को जानते हैं। इसलिए, पुतिन ने रूस की सुरक्षा परिषद के सदस्यों के साथ एक आपातकालीन बैठक की, जिसमें यूक्रेन युद्ध और यूरोप पर चर्चा की गई। रूस जल्द ही यूरोप को अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करने वाला है। पुतिन जल्द ही बुरिवेस्निक मिसाइल का परीक्षण करने वाले हैं, जो नोवाया जेमल्या में किया जाएगा। परीक्षण से पहले बैरंट सागर में युद्धपोत तैनात किए गए हैं और लगभग 500 किमी के क्षेत्र में NOTAM जारी किया गया है।

    इसके अलावा, रूस ने कजाकिस्तान में पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाना शुरू कर दिया है, जिसे यूरोप के लिए एक नया खतरा माना जा रहा है। ऐसा माना जाता है कि पुतिन की यह पूरी तैयारी यूरोप में एक अभियान शुरू करने की है, जिसे वह यूक्रेन में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के बाद शुरू कर सकते हैं।

    Conflict Donald Trump EU Geopolitics Military NATO Russia Ukraine Vladimir Putin War
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