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    Home»World»यूरोप में परमाणु खतरे की आहट: पुतिन के एटमी दांव से बढ़ी चिंता
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    यूरोप में परमाणु खतरे की आहट: पुतिन के एटमी दांव से बढ़ी चिंता

    Indian SamacharBy Indian SamacharAugust 8, 20254 Mins Read
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    अमेरिका द्वारा तय की गई समय सीमा के बाद रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। साथ ही, रूस के खिलाफ छद्म कार्रवाइयां भी शुरू हो सकती हैं, जिसमें उसके तेल जहाजी बेड़े पर हमले शामिल हैं। इन बढ़ती आशंकाओं के बीच, रूस ने नाटो के साथ संभावित युद्ध के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। इस तनावपूर्ण माहौल में, यूरोप में परमाणु डर का माहौल है, क्योंकि रूस ने एक सुपर मिसाइल के परीक्षण की तैयारी कर ली है, और अपने सहयोगी देशों को भी युद्ध के लिए तैयार कर दिया है।

    कूटनीतिक प्रयास विफल रहे हैं, और बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पुतिन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ रहा है। यह साफ हो गया है कि रूस सीजफायर लागू करने को तैयार नहीं है, जिससे अमेरिका और यूरोप के बीच रिश्ते और बिगड़ सकते हैं। ऐसे में रूस की रक्षा के लिए सबसे शक्तिशाली हथियारों की आवश्यकता होगी।

    पुतिन ने सुपर क्रूज मिसाइल के परीक्षण का आदेश दिया है। रूस के पास कई घातक परमाणु मिसाइलें हैं, लेकिन पुतिन ने एक ऐसी मिसाइल को तैनात करने की योजना बनाई है जिसे मारना मुश्किल है। इसके लिए, रूस ने 33 साल बाद नोवाया जेमल्या परीक्षण स्थल को फिर से खोला है, जहाँ वह परमाणु परीक्षण करता रहा है। अब, पुतिन ने नोवाया ज़ेमल्या से सुपर क्रूज मिसाइल के परीक्षण का आदेश दिया है।

    बुरिवेस्निक रूस की सुपर क्रूज मिसाइल है, जो दुनिया की पहली अंतरमहाद्वीपीय क्रूज मिसाइल है। यह तरल या ठोस ईंधन की बजाय परमाणु ऊर्जा से संचालित होती है। इस मिसाइल में एक परमाणु रिएक्टर लगा हुआ है, और यह लगभग 20 वर्षों तक लगातार उड़ान भर सकती है। यह उड़ान के दौरान अपने रास्ते को बदलने में सक्षम है, और कम ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता इसे अजेय बनाती है। यह परमाणु हमले करने में भी सक्षम है, और नाटो ने इसे SSC-X-9 स्काईफॉल नाम दिया है।

    इस मिसाइल को ‘फ्लाइंग चेर्नोबिल’ भी कहा जाता है। अब तक परमाणु ऊर्जा का उपयोग केवल पनडुब्बियों और विमान वाहक में ही किया गया है, लेकिन रूस ने पहली बार मिसाइल में परमाणु रिएक्टर लगाया है। यह एक चुनौतीपूर्ण काम था, जिसके कारण रूस को कई मुश्किलें आई।

    बेलारूस में युद्ध का मैदान तैयार किया जा रहा है। 2019 तक, इस मिसाइल के कई परीक्षण किए गए, लेकिन एक परीक्षण के दौरान मिसाइल दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें सात रूसी परमाणु वैज्ञानिकों की मौत हो गई। 2023 में पुतिन ने कहा था कि रूस की बुरिवेस्निक मिसाइल युद्ध के लिए तैयार है और इसे 2025 में तैनात किया जाएगा।

    पुतिन ने वाल्डाई शिखर सम्मेलन में इसे युद्ध के लिए तैयार करने की बात कही थी, और अब इसका अंतिम परीक्षण किया जाएगा। इसके साथ ही, पुतिन ने अपने सहयोगी बेलारूस को भी युद्ध के लिए तैयार कर दिया है। जापाड 2025 सैन्य अभ्यास के लिए रूसी सेना बेलारूस पहुंच चुकी है, और इसी बहाने यूक्रेन की सीमा पर सैन्य तैनाती की जा रही है।

    बेलारूस में युद्ध का मैदान तैयार हो गया है, जहां रूसी सेना यूक्रेन की सीमा पर सैन्य तैनाती कर रही है। बेलारूस ने यूक्रेनी सीमा पर सैन्य वाहनों की संख्या बढ़ा दी है और नई MLRS ब्रिगेड तैनात की हैं। एयर असॉल्ट यूनिट के ड्रोन ऑपरेटर भी यूक्रेन की सीमा पर पहुंच चुके हैं।

    रोमानिया की सीमा के पास रूस के ड्रोन गिरे हैं। नाटो के साथ सीधी जंग की आशंका बढ़ गई है, क्योंकि रूस के विस्फोटक ड्रोन यूक्रेन के पड़ोसी देशों में भी पहुंच रहे हैं। 6 अगस्त को रोमानिया की सीमा के पास रूसी ड्रोन गिरे। रोमानियाई रडार ने रूसी ड्रोन को ट्रैक किया, और खतरे को देखते हुए रोमानिया ने F-16 विमान तैनात किए।

    हालांकि, कोई भी रूसी ड्रोन रोमानिया की जमीन पर नहीं गिरा, लेकिन इससे पहले नाटो के सदस्य देश लिथुआनिया में दो बार रूसी ड्रोन गिर चुके हैं। लिथुआनिया ने कहा है कि यह नाटो की हवाई क्षेत्र का उल्लंघन है, और नाटो को रूस के खिलाफ कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए।

    पोलैंड ने कैलिनिनग्राद बेस के करीब टैंकों की तैनाती बढ़ा दी है। नाटो ने भी रूस के खिलाफ सैन्य तैनाती तेज कर दी है। पोलैंड ने कैलिनिनग्राद बेस के करीब साउथ कोरिया के K2 ब्लैक पैंथर टैंक तैनात किए हैं। कैलिनिनग्राद रूस का परमाणु बल बेस है। माना जाता है कि रूस कैलिनिनग्राद या आर्कटिक बेस से नाटो पर हमला कर सकता है, इसलिए नाटो आर्कटिक में अपनी ताकत बढ़ाने का मिशन तेज कर रहा है।

    Belarus Geopolitics Military Deployment Missile Testing NATO Nuclear Weapons Putin Russia Ukraine War
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